मोबाइल एडिक्शन बना रहा दिमागी तौर पर बीमार, स्टडी में हुआ डराने वाला खुलासा

Health tips: हमारे दिन की शुरुआत से लेकर रात की नींद तक हर जगह सोशल मीडिया मौजूद है. सुबह उठते ही सबसे पहला काम फोन की नोटिफिकेशन चेक करना, दिन में बार-बार फीड स्क्रोल करना और रात को सोने से पहले भी रील्स देखना यह हमारी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है.

मोबाइल-लैपटॉप पर काम इतने फीसदी लोग बीमार

मोबाइल लैपटॉप पर घंटों काम करने वाले लोग इन दिनों बीमारी की गिरफ्त में आ चुके हैं. इसमें युवा भी शामिल हैं. 14 से 24 साल के युवा बीमारी की गिरफ्त में हैं. पिछले एक साल में 15 से 20% मामले बढ़े हैं. युवा 24 घंटे में से 5-6 घंटे सेलफोन में बिता रहे हैं. MNC’s वाले 8 घंटे लैपटॉप,5-6 घंटे मोबाइल पर. 20% पढ़ाई करने वाले मोबाइल पर रहते हैं. मोबाइल एडिक्शन से बढ़ी 60% लोगों में नींद की बीमारी होती है.

मोबाइल फोन से होने वाली मानसिक बीमारी
सोशल मीडिया एंग्जायटी

जब आपके दिमाग में हर समय नोटिफिकेशन, लाइक, कमेंट या मैसेज घूमता रहता है या फिर जब आपका फोन आपसे दूर हो तो आपको हमेशा कुछ छूट रहा है, जैसा महसूस हो तो यह सोशल मीडिया एंग्जायटी ही है. 

FOMO यानी फियर ऑफ़ मिसिंग आउट

सोशल मीडिया पर लगातार एक्टिव रहने की आदत, यह सब इसके लक्षण हैं. सोशल मीडिया पर लोग अक्सर अपनी लाइफ का बेस्ट हिस्सा दिखाते हैं, लेकिन हमारा दिमाग इसे बिल्कुल सच मानकर हमें अंदर से असंतुष्ट करने लगता है.

डोपामिन एडिक्शन

जब आप मजेदार रील्स देखते हैं या फिर आप अपने लाइक्स देखते हैं तो आपका दिमाग और मन खुश हो जाता है, लेकिन धीरे-धीरे यह नशा बनने लग जाता है, जिसे डोपामिन एडिक्शन कहते हैं.

स्लीप डिसऑर्डर

फोन की ब्लू लाइट आपके दिमाग को यह एहसास दिलाती रहती है कि अभी रात नहीं हुई है, जिससे नींद आने में दिक्कत महसूस होती है. बहुत रात तक मोबाइल चलाना, बिस्तर पर लेटकर फोन देखना, सुबह उठने पर थकान महसूस होना या दिमाग का ओवर एक्टिव हो जाना यह सब स्लीप डिसऑर्डर के लक्षण है.

सोशल आइसोलेशन

यह एक भयानक मानसिक बीमारी है. सोशल मीडिया पर अक्सर हम सैकड़ों दोस्तों से जुड़े रहते हैं, लेकिन इससे असल की जिंदगी में अकेलापन बढ़ रहा है. इसे ही सोशल आइसोलेशन कहते हैं. बार-बार अकेलेपन की भावना महसूस होना, ऑनलाइन चैट करने से ही संतुष्टि मिलना, घर से बाहर निकलने में झिझकना, रियल लाइफ में लोगों से मिलने का मन ना होना यह इसके लक्षण है. 

ज्यादा स्मार्टफोन इस्तेमाल करने के नुकसान
  • कंप्यूटर विजन सिंड्रोम
  • रीढ़ की हड्डी पर गंभीर असर
  • स्किन से जुड़ी समस्याएं
  • नींद से जुड़ी समस्याएं
  • मानसिक तनाव का बढ़ना
  • आत्मविश्वास की कमी
  • नज़र कमज़ोर होती है.
बच्चे कर रहे फोन का मिसयूज

बच्चे इन दिनों फोन का मिसयूज भी करने लगे हैं. जिससे माता पिता अनजान हैं. वहीं 90 फीसदी पेरेंट्स अपने बच्चों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते हैं. जिसकी वजह से उनकी फोन की लत कभी नहीं छूटती और बच्चों के फोन का मिसयूज बढ़ता चला जाता है.

डिजिटल बाउंड्री तय करना जरूरी

रात में ‘No-Phone Zone’

खाने के समय स्क्रीन बंद

परिवार का Real टॉक टाइम

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