Economic Survey 2026: बजट सेशन 2026 का आज (गुरुवार को) दूसरा दिन है. लोकसभा में आज इकोनॉमिक सर्वे पेश किया जाएगा, जिसमें सरकार के एक-एक पैसे का हिसाब दिया जाएगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस आर्थिक सर्वेक्षण को सदन में पेश करेंगी. इसमें जीडीपी ग्रोथ, महंगाई, बैंक-एग्रीकल्चर समेत तमाम क्षेत्रों के प्रदर्शन और एक्सपोर्ट में बढ़ती ताकत का जिक्र हो सकता है. जान लें कि इकोनॉमिक सर्वे हर साल बजट के आने से एक दिन पहले पेश किया जाता था, लेकिन इस बार यह 2 दिन पहले लोकसभा में पेश होने वाला है.
सदन में आज पेश होगा इकोनॉमिक सर्वे
वित्त मंत्री आज (गुरुवार को) सुबह 11 बजे लोकसभा में देश का इकोनॉमिक सर्वे पेश करेंगी. इसमें जीडीपी ग्रोथ के अनुमान, अलग-अलग क्षेत्रों के प्रदर्शन समेत सरकार के खर्च हुए पैसे का भी जिक्र होगा. कुल मिलाकर आज देश के सामने केंद्र की NDA सरकार का रिपोर्ट कार्ड रखा जाएगा.
अगले 25 साल देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण- PM मोदी
PM मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है. अब दूसरे चौथाई हिस्से की शुरुआत हो रही है. विकसित भारत 2047 के टारगेट पाने के लिए इन 25 साल का अहम चरण शुरू हो चुका है. सदी के इस दूसरे चौथाई हिस्से का पहला बजट पेश होने वाला है. हम नेक्स्ट जेनेरेशन रिफॉर्म की तरफ आगे बढ़े. समय व्यवधान का नहीं समाधान का है. अब योजना सिर्फ फाइल तक नहीं लाइफ तक पहुंचती है.
क्या होता है इकोनॉमिक सर्वे और क्यों है जरूरी?
यह रिपोर्ट देश की अर्थव्यवस्था का सालाना हाल बताती है. इसमें विकास की रफ्तार महंगाई का हाल नौकरी की स्थिति व्यापार और सरकार की आय खर्च से जुड़ी जानकारी होती है. आसान शब्दों में कहें तो यह बताता है कि देश की कमाई खर्च और रोजगार की तस्वीर कैसी है और आगे किन बातों पर ध्यान देने की जरूरत है.
आसान भाषा में कहें तो इकोनॉमिक सर्वे वह आईना है जिसमें देश की पूरी कमाई और खर्चे का ब्यौरा होता है. इसमें महंगाई, खेती, उद्योग, और नौकरियों की ताजा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की जाती है.
बजट से पहले क्यों जारी होता है इकोनॉमिक सर्वे?
पहला Economic Survey साल 1950 51 में बजट के साथ पेश हुआ था. लेकिन 1964 के बाद से इसे बजट से अलग जारी किया जाने लगा ताकि बजट से पहले सांसदों और जनता को सही आर्थिक स्थिति की जानकारी मिल सके. आमतौर पर यह दो हिस्सों में होता है एक में पूरी अर्थव्यवस्था की तस्वीर होती है और दूसरे में सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर फोकस किया जाता है.
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