Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि नर नारायण भगवान की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिया। वरदान मांगने को कहा- तो नर नारायण भगवान ने हिमालय में ही बिराजने के लिए प्रार्थना किये। बद्रीनाथ से ऊपर केदार पर्वत पर भगवान केदारेश्वर के रूप में प्रकट हुए।
स्वर्गारोहण के समय पाण्डव केदारेश्वर महादेव का दर्शन करने गए, वहीं से श्री पशुपतिनाथ महादेव की कथा शिव पुराण में आई है. परिवार, काम काज अथवा जीवन की व्यवस्तता भजन में बाधक नहीं है। भजन में सबसे बड़ी बाधा है मन की चंचलता।
जब-जब मन चंचल होवे भगवान् के नामामृत और कथामृत का पान करो। कथा में बाधाआवे तो समझो कि मेरे पाप अधिक है। व्यर्थ बोलने के समान कोई पाप नहीं है। माप तौल कर बोलो। जितना जरूरी है उतना ही बोलो। वाणी को संयमित करो। अन्त समय में इच्छा होने पर भी जीव बोल नहीं पता। मन में पाप भरे हुए हैं। मन में देखोगे तो तुम्हें विश्वास होगा कि तुम्हारे मन में जितने पाप भरे हुए हैं उतने संसार में भी नहीं है।
एकाध बार का देखा हुआ सुन्दर संसारी दृश्य मन में बैठ जाता है। पर भगवत-स्मरण के समय का स्वरूप मन में नहीं बैठता। थोड़ा सा लाभ मिलने पर मनुष्य हंसता है पर नुकसान होने पर रोता है। मन ऐसा है कि अपने प्रति किये गये। उपकार को भूल जाता है और अपकार को याद रखना है।
मन को सुधारने का उपाय है। मन को उल्टा करोगे तो नमन बनेगा सबको मन से नमन करो, सभी प्रभु के स्वरूप हैं। नमन और नाम इन दो उपाय से मन सुधरता है। जगत में कोई खराब नहीं है। अपना मन ही खराब है। भगवत-कृपा से जो मिले, उसे भगवत प्रसाद समझकर प्राप्त करो। वासना रखकर नहीं। कथा के एकाध शब्द की धारणा होने पर भी मन सुधरता है।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).