Tech news: आज के समय में जब कहीं Wi-Fi उपलब्ध नहीं होता तो स्मार्टफोन का मोबाइल हॉटस्पॉट काफी काम आता है. लैपटॉप, टैबलेट या गेमिंग कंसोल जैसे Wi-Fi डिवाइस को 4G या 5G नेटवर्क के जरिए इंटरनेट से जोड़ने के लिए फोन को ही राउटर की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन सवाल है कि क्या मोबाइल हॉटस्पॉट पब्लिक Wi-Fi जितना ही जोखिम भरा है? मोबाइल हॉटस्पॉट नॉर्मली तो सुरक्षित होते हैं लेकिन कुछ सावधानियां रखना जरूरी है.
यूजर को बरतनी चाहिए ये सावधानियां
मोबाइल हॉटस्पॉट का इस्तेमाल करते वक्त यूजर को गैरजरूरी ऐप्स को बंद कर देना चाहिए, जो फोन के बैकग्राउंड में चलते रहते हैं. इससे जल्द बैटरी खत्म होने की घटना को रोका जा सकता है. उदाहरण के तौर पर यूजर को फोन की लोकेशन, स्क्रीन ब्राइटनेस , नोटिफिकेशन को टर्न ऑफ कर देना चाहिए. साथ ही पावर सेविंग मोड को ऑन कर देना चाहिए.
यूजर को हर समय हॉटस्पॉट नहीं रखना चाहिए. अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग हॉटस्पॉट ऑन करके भूल जाते हैं. इससे आपके स्मार्टफोन की बैटरी परफॉर्मेंस प्रभावित होती है. साथ ही आपके आसपास की डिवाइस के जरिए आपके इंटरनेट डेटा को एक्सेस करने की कोशिश होगी.
मोबाइल बेस्ड हॉटस्पॉट से वाई-फाई के मुकाबले कम स्पीड मिलती है. ऐसे में बेहतर होगा कि अगर ब्रॉडबैड की सुविधा उपलब्ध है, तो उसका इस्तेमाल करना चाहिए.
मोबाइल बेस्ड हॉटस्पॉट का इस्तेमाल लंबे वक्त के लिए नहीं करना चाहिए. यह वाई-फाई और ब्रॉडबैंड के मुकाबले काफी महंगा होता है. साथ ही धीमी इंटरनेट स्पीड मिलती है. जबकि ब्रॉडबैंड में कम रुपये के रिचार्ज में हाई स्पीड हासिल की जा सकती है.
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