New Delhi: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूपीआई भुगतान पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कोई टैक्स, सेस या सरचार्ज नहीं है और इससे मिलने वाली राशि भारत सरकार के समेकित कोष में नहीं जाती।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह सरकार द्वारा लगाया गया शुल्क नहीं है, बल्कि यह नेशनल पेमेंट्स कॉपोर्रेशन आफ इंडिया, पेमेंट एग्रीगेटर्स, सर्विस प्रोवाइडर्स, पीओएस मशीन प्रदाताओं और मर्चेंट बैंकों से जुड़ी व्यवस्था का हिस्सा है।
एमडीआर शुल्क को लेकर क्या बोलीं निर्मला सीतारमण
केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर शुल्क का भुगतान व्यापारी करेगा। यह पैसा भारत सरकार के पास नहीं जा रहा है और सरकार इसे लागू नहीं कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका बोझ ग्राहक पर नहीं डाला जाएगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ग्राहक इसको लेकर चिंतित हैं, क्योंकि सरकार स्पष्ट रूप से कह रही है कि इसका भुगतान उपभोक्ता को नहीं करना होगा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस व्यवस्था को ठीक से नहीं समझ पाए हैं।