शक्ति स्वरूप शांति और साहस की प्रतीक हैं माँ चन्द्रघण्टा: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिवस, तृतीयं चन्द्रघण्टेति÷ नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना के बाद, आता है तीसरा दिन। तीसरा दिन माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप माँ चन्द्रघण्टा को समर्पित है।

माँ का यह स्वरूप शक्ति,शान्ति और साहस का अद्भुत संगम माना जाता है। मां के मस्तक पर सुशोभित अर्धचन्द्र घंटे के आकार का दिखाई देता है, इसी विशेष स्वरुप के कारण उन्हें माँ चन्द्रघंटा कहा जाता है। माँ चन्द्रघंटा सिंह पर विराजमान हैं।मां दस भुजाओं वाली है। उनकी भुजाओं में दिव्य अस्त्र-शस्त्र और पवित्र वस्तुएं दिखाई देती हैं।ये मां का विवाहित स्वरूप है।भगवान शिव से विवाह होने के बाद के स्वरूप की पूजा होती है।

शिव शक्ति से ही विश्व की उत्पत्ति,स्थिति,संहारादि होते हैं। शिव अन्तिम तत्व है। उन्हें ही सत्यं शिवं सुन्दरम् तथा सद-चित्-आनन्द नाम से स्मरण किया जाता है।भगवती शिव की अन्तरंग आह्लादिनी शक्ति हैं। शक्ति से संयुक्त होकर ही शिव जगत का पालनादि भी करते हैं।

पराम्बा ने स्वयं कहां है- देवताओं ! मेरे द्वारा ही सूर्य में प्रकाश देने की शक्ति है, अग्नि में दाहिका शक्ति है, वायु में प्राण-शक्ति है और हर व्यक्ति में मेरी शक्ति है। पलक खोलने में भी शक्ति चाहिए, बोलने में भी शक्ति चाहिए और कार्य करने में भी शक्ति चाहिए। आज ये जितने कल-कारखाने चल रहे हैं, सब विद्युत- शक्ति से चल रहे हैं। इस प्रकार विद्युत भी शक्ति है। बड़ी सुन्दर बात माँ ने ये कही, जो विचार करने योग्य है। माँ यह कहती है कि जब कोई व्यक्ति कमजोर, बीमार या बहुत बूढ़ा हो जाए, तब उससे कहा जाये कि दौड़ो। तब वह कहेगा कि दौड़ने की शक्ति नहीं है। यह बोझ उठाओ, तब वह कहेगा कि बोझा उठाने की शक्ति नहीं रही। वह यह नहीं कहेगा कि मुझमें ब्रह्मा नहीं रहे,
मुझमें विष्णु नहीं रहे या शंकर नहीं रहे, साकार नहीं रहे या निराकार नहीं रहे- ऐसा नहीं कहता। वह कहता है कि मुझमें शक्ति नहीं रही। इसका मतलब है कि ब्रह्मा विष्णु सब तुम्हारे साथ हों लेकिन शक्ति तुम्हारे साथ न हो।तब तुम कुछ कर ही नहीं सकते।सारा का सारा व्यवहार,सारा का सारा कार्य शक्ति से ही होता है।सोचने में शक्ति लगती है, सुनकर उसको आत्मसात करने में भी स्मरण शक्ति की जरूरत पड़ती है। भोजन करके पचाने में भी शक्ति की जरूरत पड़ती है। कहां तक कहा जाये, यह सम्पूर्ण विश्व प्रपंच शक्ति के द्वारा ही संचालित है।

सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).

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