Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि शारदीय नवरात्रि का पांचवा दिवस-पंचमं स्कन्दमातेति÷ (अर्थात् पांचवा स्वरूप स्कन्दमाता हैं) मां दुर्गा जी के पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता कहा जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का एक नाम स्कन्द भी है। स्कन्द की माता होने के कारण इन्हें स्कन्द माता कहा जाता है।
माता अपने इस रूप में चार भुजाओं वाली हैं और उनकी गोंद में बालरूप में भगवान् स्कन्द(कार्तिकेय) बैठे होते हैं। वे कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण पद्मासन भी कहलाती हैं। मां स्कन्द माता का स्वरूप ममता,शक्ति,करुणा से युक्त है। मां का स्मरण श्रद्धा और विश्वास जगाता है।
पराम्बा भगवती सदैव साथ हैं। हम सबके अंग-संग हैं। बोलने में भी शक्तिरूप से वह ही हैं।मां भगवती की महिमा गाते हुए कहा गया है-
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
यह बुद्धि क्या है? जैसे- पाॅवर ही बल्ब में आकर प्रकाश बन जाता है। इसी प्रकार भगवती दुर्गा ही अन्दर जाकर बुद्धि बनकर सत् और असत् का निर्णय करती है। निद्रा स्वरूपा मां भगवती को नमन करते हुए कहा भी गया है-
या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
आप कहेंगे कि सुन लेते हैं, लेकिन भूल जाता है-अर्थात् आप पर भगवती की कृपा नहीं हुई। स्मृतिरूपा मां भगवती ही की स्तुति करते हुए कहा गया है-
या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).