Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि विजयदशमी बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। त्रेतायुग में भगवान् श्री राम ने इसी दिन लंका के राजा रावण का उद्धार करके भगवती सीता जी को मुक्त कराये थे, इसी घटना के स्मरण में रावण, कुम्भकरण और मेघनाथ का पुतला जलाया जाता है।
दूसरी कथा- माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर नामक दानव से भीषण युद्ध करने के बाद दसवें दिन उसका उद्धार किया था। इसीलिए यह पर्व शक्ति पूजा और दुर्गा विसर्जन का भी दिन होता है।तीसरी कथा- महाभारत के अनुसार अज्ञातवास के दौरान पाण्डवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष पर छिपाये थे। विजयदशमी के दिन उन्हें वापस उतार कर अर्जुन ने शस्त्र पूजा की और कौरवों पर विजय प्राप्त की थी। अपने यहां विजयदशमी के दिन अनादिकाल से शस्त्र पूजा का भी विधान है।
विजयदशमी का पर्व, दशहरे का पावनपर्व, श्री राम जी का विजयोत्सव है। इसी दिन भगवान श्री राम ने रावण का उद्धार किया, पूरे विश्व को संकट से मुक्त किया, यह विजयोत्सव कहलाता है।इस दिन भगवान श्री राम का पूजन होता है, सनातन धर्म में दशहरा की पूजा होती है। इस दिन जो विशेष रीति है इस दिन ठाकुर जी को हाथी पर बिठाया जाता है।
गणेश पूजन होता है, दशहरा का पूजन होता है। ठाकुर जी का तिलक होता है, ठाकुर जी को जवारा धारण कराते हैं। जो जौ नवरात्रि में बोया जाता है, जवारे आ जाते हैं। जवारे विजयदशमी को ही निकाले जाते हैं।विजयदशमी के पर्व पर ठाकुर जी को तिलक होता है। दशहरा के पदों का गान होता है। ठाकुर जी के कान पर जवारे रखे जाते हैं। भगवान को विशिष्ट प्रकार का भोग लगाया जाता है। विशिष्ट आरती की जाती है। विजय के भाव से उत्सव मनाया जाता है। सभी को भगवान का विजयोत्सव मनाना चाहिए।
वैष्णव सम्प्रदाय के चार आचार्य हैं। उनमें जगद्गुरु श्री मध्वाचार्य जी महाराज उलूपी में जिनकी पीठ है, स्थान है। ऐसे जगद्गुरु श्रीमध्वाचार्य जी महाराज साक्षात् वायुदेव के अवतार हैं। विजयदशमी के दिन भगवान माँ पराम्बा के साथ-साथ जगद्गुरु जी का उत्सव मनाया जाता है।भक्तिमार्ग में केवल भगवान ही नहीं, भगवान और माताजी के साथ-साथ भक्त की उपासना भी आवश्यक है। भक्त पूजा के बिना पूजापूर्ण नहीं मानी जाती है।इसीलिए श्री राम मंदिर में भगवान श्री सीताराम जी के साथ-साथ श्री हनुमान जी महाराज जी विराजमान होते हैं।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).