Lifestyle: योग में कई ऐसे आसन हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मन को शांत करने में मदद करते हैं, इन्हीं में से एक है बद्ध पद्मासन, इसे पद्मासन का उन्नत रूप माना जाता है। नियमित और सही तरीके से इसका अभ्यास करने से शरीर के लचीलेपन, संतुलन और स्थिरता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है, हालांकि, यह आसन करने के लिए शरीर में पर्याप्त लचीलापन होना जरूरी है।
क्या है बद्ध पद्मासन
बद्ध पद्मासन दो शब्दों से मिलकर बना है, इसमें ‘बद्ध’ का अर्थ बंधा हुआ और ‘पद्म’ का अर्थ कमल होता है, इस आसन में पैरों को पद्मासन की स्थिति में मोड़ा जाता है और हाथों को पीठ के पीछे ले जाकर पैरों के अंगूठों या पंजों को पकड़ने का प्रयास किया जाता है, इस आसन में शरीर को स्थिर रखते हुए संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है, इसे पद्मासन का उन्नत रूप माना जाता है, इसलिए शुरुआती लोगों को सीधे इसका अभ्यास करने से बचना चाहिए।
बद्ध पद्मासन करने के फायदे
शरीर का लचीलापन बढ़ाने में मददगार है, बद्ध पद्मासन के अभ्यास में कूल्हों, कंधों और पैरों को विशेष स्थिति में रखना पड़ता है, इससे इन हिस्सों के लचीलेपन और गतिशीलता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है, हालांकि, इसका अभ्यास अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए।
पीठ और शरीर की स्थिरता के लिए उपयोगी है, इस आसन में शरीर को सीधा और स्थिर रखने का प्रयास किया जाता है, इससे शरीर की मुद्रा और संतुलन पर काम करने में मदद मिल सकती है, किसी भी तरह का दर्द या असहजता होने पर आसन को जबरदस्ती नहीं करना चाहिए।
मानसिक शांति और एकाग्रता में सहायक है, योग में स्थिर आसनों को ध्यान और एकाग्रता के अभ्यास के लिए उपयोगी माना जाता है. बद्ध पद्मासन में सहज होकर बैठने और सांस पर ध्यान केंद्रित करने से मानसिक शांति का अनुभव हो सकता है।
ध्यान के अभ्यास में उपयोगी है, बद्ध पद्मासन का उपयोग ध्यान के लिए किया जा सकता है, बशर्ते व्यक्ति इसे बिना दर्द और तनाव के कर सके, योग परंपरा में इसे शरीर की स्थिरता और मन को एकाग्र करने से जोड़कर देखा जाता है।
बद्ध पद्मासन करने का सही तरीका
बद्ध पद्मासन का अभ्यास करने से पहले पद्मासन में सहज होना जरूरी है, इसे करने के लिए इन चरणों का पालन करें, सबसे पहले किसी समतल जगह पर योग मैट बिछाकर बैठ जाएं, पैरों को पद्मासन की स्थिति में रखें, इसके लिए प्रत्येक पैर को विपरीत जांघ पर रखा जाता है, अब हाथों को धीरे-धीरे पीठ के पीछे ले जाएं, अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार हाथों से पैरों के अंगूठे या पंजे पकड़ने का प्रयास करें। रीढ़ को सीधा रखें और सांस सामान्य रूप से लेते रहें, शुरुआत में कुछ सेकंड ही इस स्थिति में रहें, अभ्यास बढ़ने पर समय धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।