Religion: करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विषेश महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। सुबह सरगी खाने के बाद दिनभर व्रत रखती हैं और शाम को चांद निकलने का इंतजार करती हैं। इस दौरान घरों में पूजा की तैयारी होती है, महिलाएं सोलह शृंगार करती हैं और परिवार की परंपरा के अनुसार करवा चौथ की कथा सुनी जाती है। शाम को चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद व्रत पूरा किया जाता है।
करवा चौथ व्रत पारण समय
पंचांग के मुताबिक करवा चौथ का व्रत शाम 8 बजकर 17 मिनट के बाद खोला जा सकता है क्योंकि इतने बजे चांद निकलने की संभावना है। बता दें कि इस व्रत का पारण चांद को अर्घ्य देने के बाद ही किया जाता है। ऐसे में जब चांद निकल आए तो उसकी विधि विधान से पूजा करें। इसके बाद अपना व्रत खोल लें।
करवा चौथ का व्रत खोलने की विधि
चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। इसके लिए महिलाएं ये चरण अपना सकती हैं, चांद निकलने के बाद चंद्र देव के दर्शन करें। चंद्रमा को जल चढ़ाएं और पति की लंबी उम्र व परिवार की खुशहाली की कामना करें। प्रचलित परंपरा के अनुसार, छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखें। पति के हाथों से पानी ग्रहण करें और व्रत का पारण करें। व्रत खोलने के बाद अपनी सुविधानुसार भोजन करें।