Astrology: हिंदू धर्म में नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली का विशेष महत्व है। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है और इनके नाम दीपदान भी किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस यम का दिया निकालने से मृत्यु के देवता यमराज प्रसन्न होते हैं, जिससे परिवार में किसी की अकाल मृत्यु नहीं होती है। जानिए यम का दीपक जलाने की सही विधि और मुहूर्त।
कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को छोटी दिवाली, रूप चौदस, नरक चौदस, रूप चतुर्दशी अथवा नरका पूजा के नामों से भी जाना जाता है। छोटी दीपावली दिवाली से एक दिन पहले पड़ती है। इस दिन संध्या के समय दीपक जलाए जाते हैं और चारों ओर रोशनी की जाती है, इस दिन का दीपक जलाते हैं।
यम का दीपक जलाने का मुहूर्त
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 7 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 47 मिनट से हो रही है, तिथि का समापन अगले दिन 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर हो रहा है। नरक चतुर्दशी पर यम दीपदान का समय 7 नवंबर की शाम 5:37 बजे से रात 8:10 बजे के बीच है।
यम का दीपक जलाने की विधि
सबसे पहले मिट्टी का एक चौमुखा दीपक लें, यदि चौमुखा दीपक नहीं है तो सामान्य दीपक लें,
फिर उसमें रूई की 4 बत्ती लगाएं, उस बत्ती को इस प्रकार से लगाएं कि वो चार दिशाओं को इंगित करता हो।
उस दीपक को सरसों के तेल से भर दें और पूजा स्थान पर रख दें।
शाम को जब परिवार के सभी सदस्य घर पर आए जाएं तो प्रदोष काल में यम के दीपक को जलाएं,
यम के दीपक को घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा में रखें, दीपक के नीचे कोई अनाज रखें,
यम का दीपक अन्य स्थानों पर रखा जाता है।