Shardiya Navratri 2026 4th Day: भगवती के उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि चल रहा है। नवरात्रि के चौथे दिन आदिशक्ति भवानी के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा विशेष रूप से की जाती है।मान्यता है कि जब सृष्टि की रचना से पहले चारों ओर घना अंधकार था, तब देवी के इसी स्वरूप से ब्रह्मांड का सृजन हुआ था। इसलिए मां कूष्मांडा को सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति कहा जाता है। इनका निवास सौरमंडल के भीतर माना जाता है और इनके शरीर की कांति सूर्य के समान दैदीप्यमान है। इनके तेज से दसों दिशाएं प्रकाशित हो रही हैं।
मां कूष्मांडा का स्वरूप
मां की आठ भुजाएं हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके हाथों में धनुष, बाण, चक्र, गदा, अमृत कलश, कमल और कमंडल सुशोभित है। कहा जाता है कि कुम्हड़ा (पेठा) की बलि से देवी अत्यंत प्रसन्न होती हैं। इस स्वरूप की पूजा से अच्छे स्वास्थ्य, बुद्धि, यश और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है।
पूजा विधि
1. चौथे दिन स्नान के बाद पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
2. घर में मां की प्रतिमा का ध्यान कर मां कूष्मांडा के स्वरूप का स्मरण करें।
3. मां को पंचामृत से स्नान कराएं।
4. मां को पीले वस्त्र, पीली चूड़ियां, पीले फूल और पीली मिठाई अर्पित करें।
5. अक्षत, सिंदूर, पुष्प अर्पित कर ध्यान करें और मंत्रों का जाप करें।
6. अंत में मां की आरती उतारें और भोग लगाएं।
भोग – Maa Kushmanda Bho
gमां कूष्मांडा को मालपुए का भोग अति प्रिय है। भोग लगाने के बाद इसे ब्राह्मण को दान दें और स्वयं प्रसाद रूप में ग्रहण करें। इससे बुद्धि और यश में वृद्धि होती है और रोगों का नाश होता है।
मंत्र – Maa Kushmanda Mantra
बीज मंत्र:कुष्मांडा: ऐं ह्रीं देव्यै नम:
पूजा मंत्र:ॐ कूष्माण्डायै नम:
ध्यान मंत्र:वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥
स्तुति मंत्र:ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्मांडा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै