Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि श्राद्ध का महापर्व आठवां दिवस- हतं श्राद्धमपात्रकं÷ अपात्रक श्राद्ध जो होता है, वह श्राद्ध व्यर्थ हो जाता है। अपात्रक श्राद्ध क्या है? श्राद्ध सपात्रक होना चाहिए। सपात्रक श्राद्ध का अर्थ होता है। श्राद्ध का जो मुख्य नियम है, जब पितृपक्ष में श्राद्ध करें। पिता की क्षय तिथि पर एकोदिष्ट श्राद्ध करें, तो सामने ब्राह्मण को बैठाकर, उस ब्राह्मण के अन्दर ही पिता का आवाहन करना चाहिए।
उसी से प्रार्थना किया जाता है-” भवतां शरीरे पितृन् आहवाहयिस्ये ” आपके शरीर में मैं अपने पितरों का आवाहन करना चाहता हूं और वह ब्राह्मण कहे ” आवाहय ” आवाहन करो। तब उसे पवित्र आसन पर बैठकर, मंत्र पढ़ते हुए पितरों का आवाहन करना चाहिए। फिर भावना करना चाहिए हमारे पितर आ गये। पूजन करें, पूजन करके उसके हाथ अर्घ्य दें,भोजन करायें। भोजन करके जब वह उठ जाये तो उसी स्थल को धोकर शुद्ध करें, तब उस स्थान पर पिण्डदान करें, इस श्राद्ध को सपात्रक श्राद्ध कहा जाता है। भागवत में ये बात भगवान के सेवकों ने ही कहा है।” हतं श्राद्धं अपात्रकं ” जो श्राद्ध अपात्रक होता है वो फलदाई नहीं होता।
संदिग्धो हि हतो मंत्रो ÷ किसी ने मंत्र बताया, इस मंत्र का जाप करो, इसका ये फल है। आप जपने लगे। लाखों संख्या में आपने जपा लेकिन फल नहीं मिला। क्यों नहीं मिला? कहीं न कहीं आपके विश्वास में कमी थी। अगर संदेह है, कर तो रहे हैं, क्या होगा कि नहीं होगा, मन नीचे ऊपर हुआ तो फल नहीं मिलता है।’व्यग्रचित्तो हतो जपः’।- जप भी अगर व्यग्र चित्त से करें। चित्त कहीं इधर-उधर है। चित्त में विकृत है, नियम पूरा करना है। 11माला रोज करते हैं, लाओ जल्दी से कर ले। ऐसे व्यग्र चित्त से जप किया तो जप भी व्यर्थ हो जायेगा। एक ही माला जपो लेकिन शान्ति से, भाव से।
अदृढ़ च हतं ज्ञानं,प्रमादेन हतं श्रुतं। सन्दिग्धो हि हतो मन्त्रो,व्यग्रचित्तो हतो जपः।।अवैष्णवो हतो देशो,हतं श्राद्धमपात्रकं।हतं अश्रोत्रियं दानं÷ जो व्यक्ति आचरण संपन्न नहीं है। वेद शास्त्र का जिसे ज्ञान नहीं है। उस व्यक्ति को दिया गया दान भी व्यर्थ है।”अनाचारं हतं कुलं” जिसके कुल में आचार विचार नष्ट हो गया, वह कुल धीरे-धीरे नष्ट हो जाता है।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).