Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर सुहागिनें सच्ची श्रद्धा के साथ तीज व्रत का संकल्प करती हैं और शिव-पार्वती की उपासना करती हैं. इस व्रत को करने से सौभाग्य और पति की लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. कई बार ऐसा होता है कि इस दिन व्रती महिलाएं जाने-अनजानें कुछ ऐसी गलतियां कर देती हैं जो उसके लिए अशुभ फलदायी सिद्ध होने लगता है. आइए इस लेख में उन 5 गलतियों के बारे में जानें जिनको हरतालिका तीज पर करने से सौभाग्य कम होता है और पति की तरक्की में बाधाएं आती हैं.
हरतालिका तीज तिथि
हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है. इस साल तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा.
हरतालिका तीज पर न करें ये गलतियां
- हरतालिका तीज का व्रत अन्य व्रतों से अलग माना जाता है. मान्यता के अनुसार इस दिन व्रती को दिन में सोने से बचना चाहिए. खाली समय आराम करने के बजाय शिव-पार्वती का स्मरण, भजन, मंत्र जाप समय में बिताने की परंपरा है. रात में जागरण की भी मान्यता बताई है.
- हरतालिका तीज का व्रत एक बार शुरू करने के बाद उसे हर साल करने की परंपरा बताई जाती है. वहीं, व्रत के संकल्प का विशेष महत्व है. ऐसे में व्रत रखने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना भी जरूरी है और अस्वस्थ होने पर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए.
- हरतालिका तीज की पूजा में गणेश जी की आराधना की जाती है. पूजा की शुरुआत गणेश जी के स्मरण और पूजन से करने की परंपरा है, क्योंकि वह प्रथम पूज्य हैं. इसके बाद शिव-पार्वती की पूजा कर दांपत्य जीवन की खुशहाली और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है.
- हरतालिका तीज पर सुहागिनों के शृंगार का विशेष महत्व है. मान्यताओं के अनुसार, इस दिन काले कपड़े या काली चूड़ियां नहीं पहनना चाहिए. पूजा और शृंगार के लिए लाल, हरे या पीले रंग को प्राथमिकता दी जाती है. इन रंगों को सुहाग और शुभता से जोड़कर देखा जाता है.
- पूरे दिन व्रत रखने के साथ मन की शांति बनाए रखना भी जरूरी है. इसलिए पति, परिवार या किसी अन्य व्यक्ति के साथ विवाद करने और क्रोध करने से बचें. व्रत के दौरान नकारात्मक भावनाओं से दूरी बनाकर ध्यान और भक्ति में मन लगाना चाहिए.
इसे भी पढ़ें:-आयुर्वेद की 10 शक्तिशाली जड़ी-बूटियों के अद्भुत स्वास्थ्य लाभ, जानें आमलकी से लेकर ब्राह्मी तक के फायदे