Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और विश्वास से जुड़ा होता है. रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा बांधती हैं. यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भावनाओं की अभिव्यक्ति है. वास्तु शास्त्र अनुसार यदि सही राखी का चुनाव किया जाए, तो यही धागा भाई के जीवन में सौभाग्य, समृद्धि और तरक्की ला सकती है. शास्त्रों में राखी की कीमत से ज्यादा उसके पवित्र भाव और रक्षासूत्र का महत्व बताया गया है. तो चलिए जानते हैं कि राखी को लेकर क्या नियम बताए गए हैं.
प्रेम का पवित्र धागा
रक्षासूत्र तीन रंगों का महत्व: सनातन धर्म में रेशम या सूती धागे से बना रक्षा काफी शुभ माना गया है. इसमें लाल, पीले और सफेद रंग का प्रयोग से आकर्षक दिखता है. इन रंगों को ब्रह्मा, विष्णु और महेश से जोड़ा जाता है.
चंदन माना जाता है शुभ: राखी में चंदन का इस्तेमाल पवित्रता, शीतलता और सकारात्मकता से जोड़ा जाता है. इसलिए चंदन युक्त रक्षासूत्र को भाई के लिए अच्छा माना जाता है.
रुद्राक्ष-तुलसी की राखी: रुद्राक्ष और तुलसी से बनी राखियां भी धार्मिक भावनाओं से जुड़ी मानी जाती हैं. रुद्राक्ष का संबंध भगवान शिव और तुलसी का संबंध भगवान विष्णु से माना जाता है.
महंगी राखी जरूरी नहीं: रक्षाबंधन पर महंगी राखी खरीदना अनिवार्य नहीं है. साधारण मौली या कलावा भी पूरी श्रद्धा के साथ भाई की कलाई पर बांधा जा सकता है. मान्यता में राखी की कीमत से अधिक उसके पीछे छिपी भावना को महत्व दिया जाता है.
सोने-चांदी की राखी: रक्षाबंधन पर सोने-चांदी जैसी महंगी धातुओं से बना रक्षासूत्र बांधने की परंपरा अपनाई जा सकती है. ज्योतिषीय मान्यताओं में सोने का संबंध सूर्य और चांदी का संबंध चंद्रमा से माना जाता है.
अशुद्ध सामग्री से बचें: धार्मिक दृष्टि से अराखी का चुनाव करते समय प्लास्टिक और अशुद्ध सामग्री से बचना चाहिए. खासतौर पर राखी में चमड़े से बने सामग्री के इस्तेमाल से बचें.
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