Religion: हल छठ हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता हैं। हल छठ का पावन पर्व कृष्ण कृष्ण जन्माष्टमी से दो दिन पहले आता है. हल छठ को हर छठ, ललई छठ, बलराम जयंती के नाम से भी जानते हैं. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था. उनका शस्त्र हल है और षष्ठी तिथि को जन्म हुआ तो इस दिन को हल षष्ठी या हल छठ कहते हैं. इस दिन माताएं निर्जला व्रत और पूजन करती हैं, ताकि उनकी संतान सुखी और स्वस्थ रहें. जो नि:संतान हैं, वे संतान प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं. इस बार हल छठ पर 3 शुभ योग बन रहे हैं।
हल षष्ठी कब है
पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 2 सितंबर को सुबह 6 बजकर 12 मिनट पर प्रारंभ होगी और 3 सितंबर को प्रात: 4 बजकर 25 मिनट पर खत्म होगी. सूर्योदय की तिथि के अनुसार, हल छठ या हल षष्ठी 2 सितंबर बुधवार को है।
हल षष्ठी 2026 शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त – 04:29 AM से 05:14 AM
प्रातः सन्ध्या – 04:52 AM से 05:59 AM
विजय मुहूर्त – 02:28 PM से 03:18 PM
गोधूलि मुहूर्त – 06:42 PM से 07:04 PM
सायाह्न सन्ध्या – 06:42 PM से 07:50 PM
अमृत काल – 09:06 PM से 10:38 PM
हल षष्ठी का त्योहार क्यों मनाया जाता है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता भगवान बलराम को समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से संतान को दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी जीवन की प्राप्ति होती है। और जिन दंपतियों की कोई संतान नहीं है, उनके लिए भी यह व्रत फलदायी साबित होता है। इस दिन व्रत करने वाली स्त्रियां हल द्वारा जोती गयी फसल से प्राप्त चीजों का सेवन नहीं करती हैं, क्योंकि हल को बलराम जी का शस्त्र माना गया है। इस व्रत में सरोवर, तालाब आदि जलस्रोतों में उगाई गयी वस्तुओं का सेवन किया जाता है। वहीं गाय के दूध और दही से बनी चीजों का सेवन नहीं किया जाता है। कई क्षेत्रों में हल षष्ठी के दिन महिलाएं महुआ की दातुन करने के साथ-साथ महुआ का सेवन भी करती हैं।