Religion: सनातन धर्म में ऋषि पंचमी का त्योहार खास माना जाता है, जो सात ज्ञानी ऋषियों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। इन सात ऋषियों ने अपने बुद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान के कारण हिंदू धर्म में खास योगदान दिया है।
धार्मिक ग्रन्थों अनुसार इस साल ऋषि पंचमी का त्योहार मंगलवार 15 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। यह दिन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ेगी, जो ठीक गणेश चतुर्थी के बाद मनाया जाता है। हालांकि इस त्योहार का महत्व सिर्फ रीति-रिवाजों और व्रतों से कहीं ज्यादा अधिक है।
पूजा मुहूर्त
15 सितंबर को सुबह 11 बजकर 07 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 33 मिनट तक
सप्तऋषि कौन हैं
सप्तऋषि वे सात मानस-पुत्र ऋषि माने जाते हैं, जिनके माध्यम से वेदों का ज्ञान प्राप्त और प्रसारित हुआ। धार्मिक परंपरा में इन्हें गोत्र व्यवस्था का प्रमुख आधार बताया गया है। इसका अर्थ है कि आज जीवित लगभग हर हिंदू परिवार अपनी वंश परंपरा को इनमें से किसी न किसी ऋषि के नाम से जोड़ता है। जब विवाह, श्राद्ध या किसी धार्मिक संकल्प के दौरान अपना गोत्र बताया जाता है, तो परंपरागत रूप से इसी ऋषि-कुल या वंश परंपरा की पहचान बताई जाती है।
ऋषि पंचमी पर सप्तऋषियों का स्मरण करते हुए यह मंत्र पढ़ा जाता है
कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोथ गौतमः
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः
दहन्तु पापं सर्व गृह्णन्त्वर्ध्यं नमो नमः॥
इस मंत्र का अर्थ, कश्यप, अत्रि, भरद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ- इन सातों को सप्तऋषि कहा जाता है। वे मेरे सभी पापों को जला दें या नष्ट कर दें और मेरे द्वारा अर्पित इस अर्घ्य को स्वीकार करें। उन्हें बार-बार प्रणाम है।