Religion: इस साल करवा चौथ का पर्व 29 अक्टूबर दिन गुरुवार को मनाया जाएगा। हर वर्ष कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए पूरे दिन निर्जला उपवास करती हैं, करवा चौथ का महत्त्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई वास्तु शास्त्र से जुड़ी मान्यताएं भी हैं, जो वैवाहिक जीवन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने का सुझाव देती हैं।
करवा चौथ के व्रत में कुछ खास दिशा-निर्देशों का पालन करना शुभ माना गया है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। हिंदू धर्म में करवा चौथ बेहद खास और श्रद्धापूर्वक मनाया जाने वाला त्योहार है, जो विवाहित महिलाओं के लिए पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना का प्रतीक माना जाता है।
इस व्रत का पालन हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। वास्तु शास्त्र की मानें तो इन नियमों का पालन करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और स्थिरता बनी रहती है।
सबसे पहले सरगी ग्रहण करने की दिशा पर ध्यान दिया जाना चाहिए। दक्षिण-पूर्व दिशा को सरगी लेने के लिए सबसे उत्तम माना गया है, क्योंकि यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होती है।
इसके बाद पूजा के समय भी सही दिशा का चुनाव बहुत जरूरी होता है, करवा चौथ की पूजा करते वक्त कभी भी दक्षिण दिशा की ओर मुख करके प्रार्थना नहीं करनी चाहिए, पूजा करते वक्त चेहरा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए, ताकि आपकी मन्नत पूरी हो और घर में सुख-शांति बनी रहे।
करवा चौथ पूजन मुहूर्त
करवा चौथ पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है, पंचांग के मुताबिक, इस साल पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 38 मिनट से शाम 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा, इस दौरान महिलाएं भगवान गणेश, शिव-पार्वती और करवा माता की पूजा करती हैं।