Western Disturbance: अप्रैल के इस महीने में बेमौसम बारिश ने पूरे उत्तर भारत में आम जनजीवन को अस्त व्यस्त कर दिया है. लगातार बारिश, ओले पड़ने और ठंडी हवाओं की वजह से गर्मी की जगह लोगों को ठंडी का एहसास हो रहा है. मौसम का ऐसा मिजाज पश्चिमी विक्षोभ यानि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (Western Disturbances) की वजह से होता है. सर्दियों के मौसम में ठंड का तीखा होना और कहीं कहीं बारिश भी होने की वजह यही विक्षोभ है. तो आइए जानते हैं कि यह डिस्टर्बेंस है क्या?
क्या है वेस्टर्न डिस्टर्बेंस?
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक मौसमी सिस्टम है, जिसकी शुरुआत मध्य भूमध्य सागर से होती है. सामान्य तौर पर दिसंबर से फरवरी तक ज्यादा वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आते हैं. लेकिन अब मार्च-अप्रैल में भी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ज्यादा बार आने लगा है. इस साल मार्च-अप्रैल में लगातार दो-दो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय रहे, जिसकी वजह से अप्रैल में फरवरी जैसी ठंड और बारिश की वजह हैं. इसकी वजह से सिर्फ वेस्टर्न डिस्टर्बेंस नहीं हैं. इसमें अरब सागर की नम हवाएं भी सबसे बड़ी वजह हैं.
पश्चिमी विक्षोभ का निर्माण
पश्चिमी विक्षोभ (western disturbance) एक बाह्य उष्णकटिबंधीय चक्रवात के रूप में भूमध्यसागर में जन्म लेता है. यूरोप और आस-पास के क्षेत्र में एक उच्च दाब का क्षेत्र बन जाता है. वायुमंडलीय परिसंचरण के कारण ध्रुवीय क्षेत्रों से ठंडी हवा तुलनात्मक रूप से गर्म और उच्च आर्द्रतायुक्त हवा वाले क्षेत्र की ओर आती हैं. फलस्वरूप ऊपरी वायुमंडल में चक्रवात उत्पन्न (cyclogenesis) करने के लिए एक उपयुक्त स्थिति (निम्न दाब) बन जाती है. यह दाब सब-ट्रापिकल जेट स्ट्रीम के प्रभाव के कारण धीरे-धीरे मध्य-पूर्व से बढ़ता हुआ ईरान, अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान होता हुआ भारतीय महाद्वीप में प्रवेश कर जाता है.
यह बारिश और बर्फ क्यों लाता है?
क्योंकि यह प्रणाली अपने साथ नमी लेकर आती है इस वजह से यह भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर उस नमी को बरसा देती है. सर्दियों के मौसम में यही वजह है कि उत्तरी मैदानी इलाकों में बारिश होती है और हिमालयी क्षेत्र में भारी बर्फबारी होती है. यही कारण है कि भारत में सर्दियों के मौसम में होने वाली बारिश के लिए वेस्टर्न डिस्टरबेंस का होना काफी ज्यादा जरूरी माना जाता है.
मौसम में अचानक बदलाव
वेस्टर्न डिस्टरबेंस के आने के साथ ही अक्सर आसमान में बादल छा जाते हैं, तेज हवाएं चलने लगती हैं, ओले गिरते हैं और तापमान में गिरावट देखने को मिलती है. इसके प्रभाव से अप्रैल का महीना भी फरवरी जैसा महसूस होने लगता है. इस वक्त यह प्रभाव पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में देखने को मिल रहा है.
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