भारत का सबसे विनाशकारी युद्ध, जिसकी बर्बादी देख साधु बन गया था ये शासक

History: 262-261 ईसा पूर्व में हुए कलिंग के युद्ध को भारतीय इतिहास का सबसे विनाशकारी युद्ध माना जाता है. यह युद्ध सम्राट अशोक के शासन के आठ वर्ष बाद हुआ था. कलिंग के युद्ध में 1 लाख से ज्यादा लोग मारे गए और 2 लाख घायल हुए. कई परिवार पूरी तरह बिखर गए. युद्धभूमि रक्त से लाल हो गई थी. कलिंग युद्ध इतना भयावह था कि युद्धक्षेत्र को देखने के बाद अशोक ने हमेशा के लिए हथियार त्याग दिए.

भारी जान-माल का नुकसान 

इस युद्ध ने काफी बड़ा विनाश किया. युद्ध के मैदान में मारे गए एक लाख लोगों के अलावा इसके बाद के परिणाम भी उतने ही घातक साबित हुए. पूरे के पूरे समुदाय उखड़ गए, परिवार बिखर गए और हजारों लोग भोजन और चिकित्सा देखभाल की कमी की वजह से मारे गए. युद्ध की मानवीय कीमत ने इसे प्राचीन भारतीय इतिहास के सबसे काले हिस्सों में से एक बना दिया.

युद्ध के पीछे की वजह 

युद्ध की मुख्य वजह साम्राज्य का विस्तार था. सम्राट अशोक का उद्देश्य मौर्य समाज का विस्तार करना और अखंड भारत के सपने को पूरा करना था. अखंड भारत का यह सपना उनके दादा चंद्रगुप्त मौर्य ने देखा था. कलिंग अपने व्यापार मार्गों पर कंट्रोल और अपनी आर्थिक समृद्धि की वजह से रणनीतिक रूप से काफी ज्यादा जरूरी था. इसके कड़े प्रतिरोध ने इस लड़ाई को काफी भीषण और विनाशकारी बना दिया. 

अशोक ने त्याग दिए हथियार

कलिंग युद्ध में हुए भयंकर रक्तपात और विनाश ने अशोक को गहराई से प्रभावित किया. युद्ध के बाद की तबाही, मृतकों और घायलों की संख्या और लोगों की पीड़ा ने अशोक को विचलित कर दिया. युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म को अपनाया और अहिंसा, शांति, और धर्म के सिद्धांतों को अपने शासन का आधार बनाया.

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