Mangala Gauri Vrat 2026: सावन महीने में जितने भी मंगलवार पड़ते हैं उन सभी को मंगला गौरी व्रत करने का विधान है। इस व्रत में माता गौरी अर्थात् पार्वती जी की पूजा की जाती है, जिसके कारण इस व्रत को मंगला गौरी व्रत कहते हैं। मंगला गौरी व्रत को मोराकत व्रत के नाम से भी जाना जाता है।
पुराणों के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती को श्रावण का महीना अति प्रिय है। इसीलिए श्रावण मास के सोमवार को शिव जी और मंगलवार को माता गौरी की पूजा को शास्त्रों में बहुत ही शुभ व मंगलकारी बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी का व्रत करने से वैवाहिक जीवन सदैव सुखी रहता है और दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है। मंगला गौरी का व्रत करने से अखंड सौभाग्यवती का भी आशीर्वाद मिलता है।
मंगला गौरी व्रत शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:32 बजे से 05:20 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:05 बजे से 12:56 बजे तक
अमृत काल- रात्रि 09:18 बजे से 11:01 बजे तक
मंगला गौरी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक धनी व्यापारी धर्मपाल का पुत्र दीर्घायु नहीं था. उसे एक श्राप मिला था. व्यापारी के पुत्र का विवाह एक ऐसी कन्या से हुआ जिसकी माता नियमित रूप से मंगला गौरी का व्रत करती थी. उस व्रत के पुण्य और प्रभाव से धर्मपाल के पुत्र को लंबी आयु का वरदान मिला. तभी से वैवाहिक सुख और संकटों से मुक्ति के लिए यह व्रत रखा जाने लगा.
पूजन विधि
- सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता मंगला गौरी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
- सभी पूजन सामग्री जैसे 16 चूड़ियां, 16 श्रृंगार वस्तुएं, 16 लौंग, 16 सुपारी, 16 इलायची और 16 फल व मालाएं अर्पित करें.
- आटे से बना 16 बत्तियों वाला दीपक जलाकर घी का दीपदान करें.
- माता को सुहाग सामग्री, चुनरी और खीर का भोग लगाएं.
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