भगवान अवतार ले करके करते है दुष्टों का संहार और धर्म की स्थापना: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि भगवान नारायण के चौबीस अवतारों में तीन तरह के अवतार बताये गये हैं, अंशावतार, कलावतार और पूर्णावतार।अंशावतार को ही आवेशावतार भी कहते हैं। भगवान अंशावतार ले करके दुष्टों का संहार और धर्म की स्थापना करते हैं, जैसे-वराहवतार,पृथुवतार, भगवान परशुराम का अवतार। दूसरा कलावतार, जिसमें भगवान की कला का अवतार होता है। इस अवतार में भगवान अपने उपदेश से जगत का मंगल करते हैं, जैसे- सनकादिक अवतार, नारद अवतार, भगवान व्यास का अवतार। जब अंश और कला का संयुक्त रूप से अवतार होता है, उसे पूर्णावतार कहते हैं। और पूर्ण अवतार चौबीस अवतार में दो ही हुये, एक श्रीराम का अवतार, दूसरा भगवान् श्री कृष्ण का अवतार।दोनों अवतार कथाओं में बहुत समानता है। भगवान राम का अवतार नवमी तिथि को हुआ और भगवान श्री कृष्ण का अवतार भले अष्टमी तिथि को हुआ लेकिन नंदोत्सव दूसरे दिन नवमी को ही मनाया गया। भगवान श्री राम को मुख्य रूप से तीन माँ हैं, कौशल्या, कैकेई, सुमित्रा। भगवान् श्रीकृष्ण को भी मुख्य रूप से तीन ही माँ हैं- देवकी, यशोदा, रोहिणी। राक्षसों के संहार लीला में सबसे पहले प्रभु श्री राम तड़का का उद्धार करते और भगवान श्री कृष्ण ने पूतना का उद्धार किया। रामायण के मुख्य टीकाकार तड़का को अविद्या कहते हैं और भागवत के महान टीकाकार पूतना के लिये कहते हैं “अविद्या पूतना नष्टः”। भगवान् श्री राम जब किशोरावस्था को प्राप्त हुए तब उन्हें लेने के लिए श्री विश्वामित्र जी अयोध्या पधारे और भगवान श्री कृष्ण को लेने के लिए मथुरा से वृंदावन श्रीअक्रूर जी आये, दोनों सरकार को वन बहुत प्रिय है।सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).

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