Religion: शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इस साल यह दिन 15 अक्टूबर गुरुवार को पड़ रहा है। मां स्कंदमाता को प्रेम, ममता और संतान सुख का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, उनकी पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और भक्तों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। मां स्कंदमाता को विद्यावाहिनी, माहेश्वरी और गौरी के नाम से भी जाना जाता है। जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
मां स्कंदमाता का स्वरूप
मां स्कंदमाता नवदुर्गा का पांचवां स्वरूप हैं। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है और उनकी मां होने के कारण देवी का नाम स्कंदमाता पड़ा। माता की गोद में भगवान कार्तिकेय बालरूप में विराजमान रहते हैं। ऐसी मान्यता है कि मां स्कंदमाता की पूजा से संतान सुख की कामना पूरी होती है और जीवन की चुनौतियों का सामना करने का साहस मिलता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता का पूजन किया जाता है। पंचमी तिथि 15 अक्टूबर को रात 1 बजकर 14 मिनट से शुरू होकर 16 अक्टूबर को रात 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगी।
मां स्कंदमाता की पूजा विधि
नवरात्रि की पंचमी तिथि पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़ककर उसे शुद्ध करें। फिर लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और मां स्कंदमाता की तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद देवी मां का ध्यान करके और पूजा का संकल्प लें। मां को पीले फूल, पीले वस्त्र और शृंगार की सामग्री अर्पित करें। इसके बाद इलायची, लौंग और पान का पत्ता चढ़ाएं। श्रद्धा पूर्वक मां के मंत्र का 108 बार जाप करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। फिर स्कंदमाता की व्रत कथा सुनें और अंत में आरती करके प्रसाद सभी में बांट दें।