दिवाली पर पटाखों के धुएं से आंखों को ऐसे बचाएं, ये लापरवाही पड़ सकती है भारी

Diwali Eye Care Tips: दिवाली रोशनी और खुशियों का त्योहार है। घर सजते हैं, रंग-बिरंगे दीये और झालरों की जगमगाहट रहती है। लेकिन इसी जश्न के बीच हम अक्सर अपनी आंखों की सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। पटाखों का धुआं, धूल और बुरादा आंखों में जलन, पानी आना और एलर्जी पैदा कर सकता है।कई लोग इसे मामूली समझकर टाल देते हैं, जबकि एक्सपर्ट्स के मुताबिक यही ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकता है, जिससे रोशनी तक जा सकती है।

पटाखों के धुएं से आंखों को ऐसे बचाएं

दिवाली पर आंखों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। पटाखों का धुआं और धूल आंखों में जलन बढ़ाते हैं। इसके अलावा त्योहारों में लगने वाला हैवी मेकअप और कॉन्टैक्ट लेंस अगर सही से इस्तेमाल न किए जाएं तो भी आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए दिवाली से पहले आंखों की जांच जरूर कराएं, खासकर डायबिटीज के मरीजों को इसमें लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतनी चाहिए।

आंखों की देखभाल कैसे करें?

स्क्रीन टाइम कम करें: मोबाइल, लैपटॉप और टीवी को लगातार देखने से आंखों में थकान और सूखापन होता है। हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें (20-20-20 रूल)।

पलकें झपकाते रहें: स्क्रीन देखते समय बार-बार पलकें झपकाना आंखों को नम रखता है।

पूरी नींद लें: दिवाली की भागदौड़ और देर रात तक जागने से आंखों पर असर पड़ता है, 7-8 घंटे की नींद जरूरी है।

आई केयर और हाइजीन जरूरी

  • बिना हाथ धोए आंखों को न छुएं।
  • अपना मेकअप, काजल, लेंस किसी और से शेयर न करें।
  • एक्सपायर हो चुके कॉस्मेटिक्स का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
  • रात में सोने से पहले आंखों का मेकअप अच्छे से हटा दें।
  • कॉन्टैक्ट लेंस की सफाई का पूरा ध्यान रखें और सोते समय लेंस निकाल दें।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी आई ड्रॉप न डालें।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

अगर आंखों में लालिमा, तेज दर्द, लगातार पानी आना, धुंधला दिखना या रोशनी के चारों ओर घेरा दिखना जैसे लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। अचानक नजर चली जाना, तेज दर्द या पटाखे से चोट लगना इमरजेंसी हो सकती है, घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद न करें।

डायबिटीज के मरीज रहें ज्यादा सावधान

डायबिटीज और हाई BP के मरीजों के लिए खतरा ज्यादा है। डायबिटीज से रेटिना की नसों को नुकसान (डायबिटिक रेटिनोपैथी) पहुंचता है और शुरू में इसके लक्षण दिखते भी नहीं। इसलिए साल में कम से कम एक बार रेटिना चेकअप और शुगर-BP कंट्रोल बहुत जरूरी है।

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