जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन पितरों के पूजा का क्या है महत्व, जानें कथा और शुभ मुहूर्त

Jitiya vrat: जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत के दिन पितरों की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि यह व्रत पितृ पक्ष (श्राद्ध काल) के दौरान ही आता है. हिंदू धर्म में कई ऐसे व्रत और पर्व हैं, जिनमें महिलाएं अपने परिवार और संतान की सुख-समृद्धि के लिए कठिन तपस्या करती हैं. इन्हीं में से एक है जितिया, जिसे संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना के लिए रखा जाता है.

इस व्रत की सबसे खास बात यह है कि इसमें माताएं करीब 24 घंटे से भी अधिक समय तक निर्जला उपवास करती हैं. यानी व्रत के दौरान अन्न तो दूर, पानी तक ग्रहण नहीं किया जाता है.

कब रखा जाएगा जीवित्पुत्रिका व्रत

हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर की सुबह 4 बजकर 29 मिनट से शुरू होगी और 4 अक्टूबर की सुबह 2 बजकर 21 मिनट तक रहेगी.उदया तिथि की मान्यता के कारण 3 अक्टूबर को ही जितिया व्रत रखा जाएगा.

जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत पूजा शुभ मुहूर्त 2026

ब्रह्म मुहूर्त – 04:38 AM से 05:26 AM

प्रातः सन्ध्या – 05:02 AM से 06:15 AM

अभिजित मुहूर्त – 11:46 AM से 12:34 PM

गोधूलि मुहूर्त – 06:05 PM से 06:29 PM

सायाह्न सन्ध्या – 06:05 PM से 07:18 PM

जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत पूजा विधि

जितिया व्रत के दिन मुख्य रूप से भगवान सूर्य नारायण और राजा जीमूतवाहन की पूजा होती है.

इस पूजा के लिए जितिया व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें.

फिर स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें. 

फिर भगवान सूर्य नारायण की विधि विधान पूजा करें.

धूप, दीप आदि से आरती करें.

इसके बाद उन्हें खीर या अन्य किसी चीज का भोग लगाएं.

बता दें इस व्रत की मुख्य पूजा शाम में की जाती है.

शाम की पूजा के लिए मिट्टी और गाय के गोबर से चील व सियारिन की मूर्ति बनाएं.

फिर कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि चीजें चढ़ाएं.

इसके बाद विधि-विधान से पूजा करें और व्रत कथा सुनें.

इसके बाद कुछ न कुछ दान करें.

इस व्रत का पारण अगले दिन सुबह पूजा के बाद किया जाता है.

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