Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि शारदीय नवरात्रि का सातवां दिवस- सप्तमं कालरात्रीति, शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि को समर्पित होता है। जिन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है। माँ कालरात्रि का रंग काली रात की तरह काला है।
माँ के तीन नेत्र और चार भुजाएं हैं। माँ की दाहिनी दो भुजाएं वरमुद्रा और अभय मुद्रा में होती हैं तथा वायीं भुजा में खड़ग और खप्पर होता है। माँ कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यन्त उग्र लगता है लेकिन माँ अपने भक्तों को हमेशा शुभ फल प्रदान करती है। इसलिए माँ को शुभंकरी कहा जाता है। मां कालरात्रि को भूत-प्रेत, नकारात्मक ऊर्जा और असुरों (जैसे रक्तबीज,शुम्भ-निशुम्भ) का नाश करने वाली देवी माना गया है।माँ कालरात्रि का स्मरण-पूजन-भय, भूत-प्रेत बाधा और नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने वाला है।
सात्विक जीवन बिताएं और सात्विक भजन करें। नवार्ण मन्त्र की दीक्षा लें और पराम्बा का चिन्तन करें। आपको बुद्धि मिलेगी, शक्ति मिलेगी, शत्रुओं का नाश होगा और लक्ष्मी प्राप्त होगी। महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती ये तीन देवियां हैं। महाकाली आपके शत्रुओं को मारने के लिए,दुष्टों को मारने के लिए कालरूपा हैं।आप कहेंगे कि हमारा कोई शत्रु है ही नहीं। हो सकता है आपके बाहर कोई शत्रु न हों,लेकिन काम, क्रोध और ममता आदि आपके अन्दर के अनेक शत्रु आपके अन्दर डेरा जमाए बैठे हैं। बाहर शत्रु नहीं है, फिर भी माँ का स्मरण करें, महाकाली का स्मरण करें, ” आद्यां विद्यां च धीमहि ” । महालक्ष्मी- लक्ष्मी की आवश्यकता आपको है ही।
महासरस्वती बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी, वे आपकी बुद्धि को बिगड़ने नहीं देंगी। बुद्धि की डोर मां के हाथ में सौंप दें,माँ ठीक रास्ते पर ले जायेंगी।जैसे गाड़ी अथवा रथ अच्छे चालक के हाथ में हो तब ठीक लक्ष्य पर पहुंच जाता है,जहां आप चाहते हैं वही पहुंचते हैं। श्रेष्ठ चालक के न होने पर आपकी गाड़ी कहीं की कहीं जा सकती है। इसीलिए आप अपनी बुद्धि की डोर माँ के हाथ में सौंप दें।
अर्जुन ने अपने घोड़े की लगाम श्रीकृष्ण के हाथ में सौंप दिया, इसीलिए उन्होंने कौरवों की विशाल सेना पर विजय प्राप्त की और उनका जीवन सफल हो गया। जैसे- अर्जुन ने अपने घोड़ों की लगाम श्रीकृष्ण के हाथ में दे दी, इसी प्रकार आप अपनी बुद्धि की लगाम भगवान के हाथ में दे दें, माँ के हाथ में दे दें और प्रार्थना करें – हे माँ आप ही बुद्धि-रूपा हो, हमें ऐसे रास्ते पर ले जाओ कि हमारा जीवन सुखी रहे, शान्त रहे और अन्त में आपकी प्राप्ति हो जाये।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).