Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि शारदीय नवरात्रि का आठवां दिवस-महागौरीति चाष्टमम्, मां महागौरी नवदुर्गा का आठवां स्वरूप है। जिनकी पूजा मुख्य रूप से नवरात्रि के आठवें दिन दुर्गा अष्टमी को की जाती है। मां महागौरी का स्वरूप अत्यन्त शान्ति सौम्य और पूर्णतः गौर वर्ण है। माता पार्वती ने कठिन तप किया, धूप ताप से शरीर काला पड़ गया। कठिन तप से प्रसन्न होकर शिवजी प्रगट हुए। स्वीकार किया, प्रसन्न होकर गंगाजल से स्नान कराया, गंगाजल का स्पर्श होते ही माँ का रंग गौर हो गया। तभी से मां का नाम महागौरी पड़ा। मां की चार भुजा है। मां महागौरी की पूजा से भक्तों के समस्त पाप नष्ट होते हैं और जीवन में शान्ति व समृद्धि आती है।
वेदों में पारम्बा भगवती कहती हैं, कि मैं ही ब्रह्मस्वरूपिणी हूँ , ‘मत्तः प्रकृति पुरुषात्मकं जगत् ‘ मुझसे ही प्रकृति और पुरुषात्मक जगत का निर्माण होता है। मैं ही ग्यारह रूद्र हूं, मैं ही बारह सूर्य हूँ, मैं ही
अष्टवसु हूँ ,सत् और असत् भी मैं ही हूँ , अमृत और मृत्यु भी मैं हूँ । प्रलयकाल में न मैं स्त्री हूँ , न मैं पुरुष हूँ। वहां केवल सत्ता के रूप में निर्विकार और निराकार रूप में मैं विराजमान हूँ।
भक्तों के कल्याणार्थ वैकुण्ठधाम भी है और शिवलोक भी है। पराम्बा भगवती के दिव्यलोक का नाम ‘ मणिद्वीप ‘ है।
श्रीमद्देवीभागवत महापुराण में बहुत विस्तार है। माँ का यह लोक 44 परकोटों से घिरा हुआ है और सुधासागर के बीच में है। इस पृथ्वी-लोक को घेरने वाला खारा समुद्र है। मां का मणिद्वीप सुधा-समुद्र से आवृत्त है। अमृत का एक कण मिल जाने से मरा व्यक्ति जीवित हो सकता है। एक पारसमणि मिल जाने से सारे संसार की गरीबी दूर हो सकती है, जरा सी पारसमणि से लोहे को छुओ, लोहा सोना बन जाता है। यह पारसमणि का ही लक्षण है, लेकिन मां का जो धाम है, वह पूरा पारसमणियों से ही बना है।
एक कल्पवृक्ष मिल जाने से मृत्यु-लोक और स्वर्ग-लोक की समस्त कामनाएं पूरी हो जायें, लेकिन मां के धाम के सारे बाग पारिजात कल्पवृक्षों के हैं। देवी भागवत में लिखा है कि सुबह उठकर
सुधा-समुद्र मणिद्वीप और वहां की दिव्य कल्प वाटिकाओं, हरि चन्दन वाटिकाओं और पारिजात वाटिकाओं का ध्यान कर लेने से आप जल्दी बीमार नहीं होगें,गरीब नहीं होंगे,आपका जीवन धन्य-धन्य हो जायेगा।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).