Ayodhya: अयोध्या आज एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बना, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की विधिवत स्थापना और पूजन किया. राष्ट्रपति ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिजीत मुहूर्त में इस अनुष्ठान में भाग लिया. इससे पहले उन्होंने राम दरबार के दर्शन कर आरती उतारी और मंदिर परिसर में पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की. इस आयोजन को राम मंदिर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है. इस मौके पर योगी आदित्यनाथ, आनंदीबेन पटेल, राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी और कई संत-धर्माचार्य मौजूद रहे. वैदिक आचार्यों के निर्देशन में पूरे विधि-विधान से श्रीराम यंत्र की स्थापना संपन्न कराई
सांस्कृतिक रंग में रंगा स्वागत समारोह
राष्ट्रपति के आगमन को खास बनाने के लिए अयोध्या शहर को सांस्कृतिक रूप से सजाया गया था. जगह-जगह मंच बनाकर लोकगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुतियां दी गईं. जैसे ही राष्ट्रपति शहर में प्रवेश कर रही थीं, उन्हें पूर्वांचल की लोक संस्कृति की झलक दिखाई दी. ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक नृत्य ने माहौल को और भी उत्साहपूर्ण बना दिया.
स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज बोले- इसके साथ ही राम मंदिर का निर्माण परिपूर्ण हुआ
राममंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना के बाद आयोजित कार्यक्रम में हजारों रामभक्तों को संबोधित करते हुए श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि इसके साथ ही 500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद प्रभु श्रीराम के मंदिर का निर्माण परिपूर्ण हो गया है.
रामलला के दर्शन और 5 घंटे का प्रवास
राष्ट्रपति मुर्मू ने राम मंदिर परिसर में रामलला और राम परिवार के दर्शन भी किए. वह करीब 5 घंटे तक अयोध्या में मौजूद रहेंगी और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी. इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना गया है.
चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था
पूरे आयोजन को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए. शहर को कई जोन और सेक्टर में बांटकर लगभग 3000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई. एयरपोर्ट से लेकर मंदिर परिसर और प्रमुख मार्गों तक कड़ी निगरानी रखी गई.
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