Delhi: भारतीय तटरक्षक बल ने अपना पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत (PCV), ICGS समुद्र प्रताप, कमीशन किया है, जो राष्ट्रीय समुद्री क्षमता विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है. इस पोत का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) ने किया है और इसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कमीशन किया. यह कमीशनिंग ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत भारत की आत्मनिर्भरता पर जोर देती है. बुधवार को भारतीय तट रक्षक जहाज ICGS समुद्र प्रताप की कमीशनिंग पर पीएम मोदी ने कहा कि यह जहाज हमारी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाता है और पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है.
‘यह हमारी आत्मनिर्भरता की दृष्टि को मजबूती देता है‘
पीएम मोदी ने ‘X’ पर लिखा, ‘ICGS समुद्र प्रताप का कमीशनिंग कई कारणों से महत्वपूर्ण है. यह हमारी आत्मनिर्भरता की दृष्टि को मजबूती देता है, हमारी सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देता है और पर्यावरण संरक्षण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.’ ICGS समुद्र प्रताप भारतीय तटर रक्षक के लिए अब तक का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक जहाज है. इसे वास्को डि गामा में स्थित गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा बनाया गया है. ICGS समुद्र प्रताप का निर्माण 23 फरवरी 2022 को शुरू हुआ था. यह जहाज समुद्र में प्रदूषण से निपटने के लिए विशेष रूप से बनाया गया है.
इस जहाज का फायर फाइटिंग सिस्टम भी है खास
ICGS समुद्र प्रताप में आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियां हैं, जैसे साइड-स्वीपिंग आर्म्स, हाई-कैपेसिटी ऑयल रिकवरी सिस्टम, फ्लोटिंग बूम्स, एडवांस्ड स्किमर्स, एक समर्पित प्रदूषण नियंत्रण लैबोरेटरी और तेल के रिसाव को रोकने, इकट्ठा करने और स्टोर करने के लिए पोर्टेबल बार्जेस. समुद्री सुरक्षा और आग से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने के लिए जहाज में एक शक्तिशाली एक्सटर्नल फायर फाइटिंग सिस्टम (Fi-Fi Class 2) है, जो अन्य जहाजों या ऑफशोर इंस्टॉलेशन्स पर लगी बड़ी आग से निपट सकता है. इससे समुद्री आपात स्थितियों में शुरुआती मदद मिल सकती है.
कई अन्य खासियतों से लैस है ICGS समुद्र प्रताप
‘समुद्र का वैभव’, राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए स्वच्छ और सुरक्षित समुद्री संचालन सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह भारत की घरेलू जहाज निर्माण क्षमता में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है. पूरी तरह से भारत में निर्मित ICGS समुद्र प्रताप में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है. 114.5 मीटर लंबे इस पोत की गति 22 समुद्री मील प्रति घंटे से अधिक है. इसके उन्नत ऑटोमेशन और कंप्यूटरीकृत नियंत्रण प्रणालियाँ जटिल जहाज निर्माण परियोजनाओं में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता को उजागर करती हैं. यह पोत लगभग 4,200 टन का विस्थापन करता है और दो 7,500 kW डीजल इंजनों द्वारा संचालित होता है. इसमें स्वदेशी रूप से विकसित कंट्रोलेबल पिच प्रोपेलर (CPPs) और गियरबॉक्स हैं, जो उत्कृष्ट गतिशीलता प्रदान करते हैं.
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