Health Ministry: देश में दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने दिसंबर 2025 में की गई जांच के नतीजे जारी किए हैं. CDSCO की वेबसाइट पर प्रकाशित मंथली ड्रग अलर्ट रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान 167 दवाओं के सैंपल “नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (NSQ)” पाए गए, जबकि 7 दवाएं नकली (Spurious Drugs) घोषित की गई हैं. यह रिपोर्ट फार्मा सेक्टर में निगरानी तंत्र की सक्रियता को दर्शाती है और उपभोक्ताओं के लिए सतर्क रहने का संकेत भी है.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने 167 दवाओं को किया फेल
जिन दवाओं को जांच में फेल पाया गया है उनमें एक या एक से अधिक पैरामीटर्स में फेल पाया गया है. दवाओं के गुणवत्ता मानकों पर असफल होने के आधार पर उसे एनएसक्यू के रूप में चिह्नित किया जाता है. इस बीच, दिसंबर में गाजियाबाद से चार दवा नमूनों और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) अहमदाबाद, बिहार और महाराष्ट्र से एक-एक नमूने को नकली पाया गया. इन दवाओं को दूसरे कंपनियों के बड़े ब्रांड नाम का इस्तेमाल करते गलत तरीके से बेचा जा रहा था.
बाजार में बिक रही हैं नकली दवाएं
कई कंपनियां बड़ी कंपनियों के नाम का इस्तेमाल कर दवाएं बनाकर बेच रही हैं. बाजार में इन दिनों नकली दवाएं भी धड़ल्ले से बिक रही हैं. जांच में ऐसी दवाएं पकड़ी जाती है जो नकली होती हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि एनएसक्यू और नकली दवाओं की पहचान करने की यह कार्रवाई राज्य नियामकों के साथ मिलकर नियमित रूप से हर महीने की जाती है. जिससे नकली दवाओं की पहचान कर उन्हें बाजार से हटाया जा सके.
NSQ टैग का क्या मतलब होता है?
मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, NSQ का अर्थ यह नहीं कि दवा खतरनाक है या कंपनी अविश्वसनीय है. कई बार बैक्टीरियल कंटैमिनेशन, स्टोरेज समस्या या तकनीकी खामी के कारण कोई बैच मानकों पर खरा नहीं उतर पाता. ऐसे मामलों में सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं.
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