समन्वय बैठक में हुआ खुलासा, तबादले के बाद नई तैनाती पर नहीं पहुंचे सैकड़ो जवान

New Delhi: दिल्ली पुलिस के हुए तबादले के बाद 215 से अधिक पुलिसकर्मी की नई तैनाती वाली यूनिट में रिपोर्ट किए बिना ही व्यवस्था से बाहर हो गए हैं। इसे लेकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय में स्पष्ट जानकारी नहीं है। बता दे कि यह खुलासा पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा की अध्यक्षता में हुई समन्वय बैठक में किया गया है।



पुलिसकर्मियों के तबादले, रवानगी, तैनाती और आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। जिसमें पुलिस आयुक्त संजय भाटिया ने प्रस्तुति के दौरान बताया कि 215 से अधिक पुलिसकर्मी पुराने जिले से रिलीव होने के बाद नई यूनिट में आमद कराने नहीं पहुंचे। इस पर पुलिस आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल स्थिति स्पष्ट करने और पूरी व्यवस्था की समीक्षा के निर्देश दिए।

पुलिस के मुताबिक इस बैठक में भ्रष्टाचार के मामलों पर भी सख्त रुख अपनाया गया। पुलिस आयुक्त ने निर्देश दिया कि रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने या भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच अधिकतम तीन महीने में पूरी की जाए, ताकि उनके विरुद्ध आगे की कार्रवाई समयबद्ध तरीके से की जा सके।

पुलिस पर अटैचमेंट का खेल पड़ रहा है भारी
बैठक में पुलिसकर्मियों की लंबे समय तक अनौपचारिक अटैचमेंट पर भी चिंता जताई गई। कई मामलों में पुलिसकर्मी वेतन एक जिले से लेते हैं, वही वर्षों तक किसी अधिकारी के साथ दूसरी जगह तैनात रहते हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे जवाबदेही कमजोर होती है और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ती है। बता दे कि कुछ महीने पहले वसंतकुंज में एक आईपीएस अधिकारी और 16 वर्षों से उनके साथ तैनात हवलदार के बीच मारपीट का मामला भी इसी संदर्भ में चर्चा में आया। पुलिस आयुक्त ने इस व्यवस्था को गलत बताते हुए इसे समाप्त करने और नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।


तीन महीने में जांच पूरी कर होगी कार्रवाई
पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में विभागीय कार्रवाई अब लंबित नहीं रखी जाएगी। रिश्वत लेते पकड़े गए या भ्रष्टाचार में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों की विभागीय जांच तीन महीने में पूरी कर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी, ताकि दोषियों के खिलाफ समयबद्ध निर्णय लिया जा सके

सात वर्ष बाद हुई समन्वय बैठक
दिल्ली पुलिस में समन्वय बैठक का आयोजिन हर वर्ष किया जाता था। इसमें पुलिस आयुक्त, स्पेशल सीपी, संयुक्त विभिन्न इकाइयों के डीसीपी शामिल होकर प्रशासनिक और आंतरिक विषयों की समीक्षा करते हैं। अंतिम नियमित बैठक 2019 में हुई थी, जबकि 2020 में कोरोना महामारी के दौरान यह ऑनलाइन आयोजित की गई थी। इसके बाद पहली बार यह बैठक आयोजित हुई, जिसमें प्रशासनिक पारदर्शिता, अटैचमेंट व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण को प्रमुख एजेंडा बनाया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *