New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद वैश्विक नेताओं, विशेषज्ञों और अन्य मेहमानों का भारत में स्वागत किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने डेटा, ज्ञान और नवाचार के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आज के दौर में असली ताकत केवल संसाधनों का होना नहीं, बल्कि उनका इस्तेमाल लोगों को सशक्त बनाने के लिए करना है।
पीएम मोदी ने माइकल ब्लूमबर्ग का किया जिक्र
बता दें कि पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत माइकल ब्लूमबर्ग का जिक्र करते हुए किया। उन्होंने कहा कि ब्लूमबर्ग का सफर करीब तीन दशकों का रहा है। वह मीडिया जगत की एक प्रतिष्ठित हस्ती होने के साथ-साथ सफल पेशेवर और समर्पित व्यक्तित्व भी हैं। पीएम मोदी ने भारत के प्रति उनके लगाव की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाता है। यहां अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा और वैश्विक मामलों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होती है। पीएम मोदी ने इस आयोजन के पहली बार भारत में होने पर खुशी जताई और माइकल ब्लूमबर्ग तथा उनकी पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत में इस कार्यक्रम का आयोजन सही समय पर लिया गया एक अच्छा फैसला है।
दुनिया में शक्ति के स्रोत समय के साथ बदलते रहे हैं
पीएम मोदी ने इस साल फोरम की थीम का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया में शक्ति के स्रोत समय के साथ बदलते रहे हैं। हालांकि, 21वीं सदी में शक्ति की परिभाषा तेजी से बदल रही है। आज डेटा, ज्ञान और नवाचार को ताकत के प्रमुख स्रोत के रूप में देखा जा रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि अब महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि शक्ति किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने तकनीक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या इसका लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित रहेगा या इससे करोड़ों लोगों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। इसी तरह, ज्ञान का उपयोग केवल चुनिंदा लोगों की ताकत बढ़ाने के लिए होगा या इससे पूरे समाज की क्षमताओं को विकसित किया जाएगा।
एक संस्कृत श्लोक का भी उल्लेख किया
पीएम मोदी ने इस विचार को पावर टू एंपावर यानी दूसरों को सशक्त बनाने की शक्ति का नाम दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल दूसरों को सीख देने वाला विचार नहीं है, बल्कि मानवीय मूल्यों से जुड़ी एक ऐसी सोच है, जिसे भारत ने अपनी हजारों साल पुरानी परंपराओं से सीखा है। पीएम मोदी ने एक संस्कृत श्लोक का भी उल्लेख किया, जो ज्ञान, धन और शक्ति के सही इस्तेमाल का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि “विद्या विवादाय, धनं मदाय, शक्तिः परेषां परिपीडनाय खलस्य. साधोर्विपरीतमेतत् ज्ञानाय, दानाय च रक्षणाय।”