Health care: सोशल मीडिया पर इन दिनों लिम्फैटिक वॉकिंग काफी वायरल हो रही है. यह कोई हार्ड एक्सरसाइज नहीं, बल्कि सही पोस्चर, गहरी सांस और हाथों को हिलाते हुए की जाने वाली एक खास तरह की वॉक है. कहा जा रहा है कि इससे सूजन और ब्लोटिंग कम होती है, लेकिन क्या सच में ऐसा है?
क्या है लिम्फैटिक सिस्टम?
डॉक्टर के मुताबिक, लिम्फैटिक सिस्टम खून की नलियों और लिम्फ नोड्स का एक नेटवर्क है, जो शरीर में फ्लूइड बैलेंस और इम्युनिटी को मेंटेन करता है. दिल की तरह इसका कोई पंप नहीं होता, बल्कि मसल्स का मूवमेंट और सांस लेने की प्रक्रिया से लिम्फ फ्लूइड आगे बढ़ता है. हल्की वॉक पैरों की मसल्स को एक्टिव करती है और फ्लूइड फ्लो को सपोर्ट कर सकती है.लेकिन हर सूजन का इलाज सिर्फ वॉकिंग नहीं है. पैरों या पेट में लगातार सूजन नसों, लिम्फैटिक सिस्टम, किडनी, लिवर की बीमारी या कुछ दवाओं के कारण भी हो सकती है. ऐसे में सिर्फ वॉक पर निर्भर न रहें, डॉक्टर से जांच जरूर कराएं.
क्या ब्लोटिंग में फायदा होता है?
ब्लोटिंग की वजह अलग होती है. ये गैस बनना, कब्ज, फूड इनटॉलरेंस या IBS जैसी वजहों से होती है. खाना खाने के बाद 10-15 मिनट की हल्की वॉक से आंतों की एक्टिविटी बढ़ती है, गैस पास होने में मदद मिलती है और पेट का भारीपन कम लगता है.हालांकि, ऐसा कोई क्लिनिकल सबूत नहीं है कि लिम्फैटिक वॉकिंग से सीधे ब्लोटिंग ठीक हो जाती है. इससे जो भी आराम मिलता है, वह आम फिजिकल एक्टिविटी की वजह से पाचन बेहतर होने से मिलता है. यह न तो शरीर से टॉक्सिन निकालती है और न ही सीधे पेट की चर्बी कम करती है.डॉक्टर सलाह देते हैं कि रोज हल्की वॉक करें, पानी पर्याप्त पिएं और टॉयलेट रूटीन रेगुलर रखें. लेकिन अगर पेट लगातार फूला रहे, बिना वजह वजन घटे, तेज दर्द, उल्टी या मल में खून आए तो तुरंत डॉक्टर से मिलें.
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