Lifestyle: आज की व्यस्त जीवनशैली में लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करना और खानपान पर ध्यान न देना शरीर के लिए कई तरह की परेशानियां खड़ी कर सकता है। खासकर कंधे, पीठ और कूल्हों में जकड़न की समस्या आम होती जा रही है। ऐसे में नियमित योगाभ्यास शरीर को सक्रिय और लचीला बनाए रखने में मदद कर सकता है।
बता दें कि योगासनों में गोमुखासन को भी शामिल किया जाता है। गोमुखासन को नियमित रूप से करने से शरीर की अकड़न और जकड़न कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही यह आसन शरीर के संतुलन और एकाग्रता पर भी काम करता है। हालांकि, इसे सही तरीके और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करना जरूरी है।
गाय के मुख जैसी होती है शरीर की मुद्रा
गोमुखासन का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है- ‘गो’ यानी गाय और ‘मुख’ यानी चेहरा। इस आसन में पैरों और घुटनों की स्थिति ऐसी बनती है कि शरीर का निचला हिस्सा गाय के मुख जैसा दिखाई देता है। इसी वजह से इसे गोमुखासन कहा जाता है। यह एक बैठकर किया जाने वाला योगासन है, जिसमें शरीर को सीधा रखते हुए पैरों और हाथों को विशेष स्थिति में रखा जाता है। सही तरीके से अभ्यास करने पर यह कंधों, कूल्हों और पैरों के आसपास के हिस्से में खिंचाव पैदा करता है।
गोमुखासन कैसे करें
गोमुखासन का अभ्यास करते समय जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। इसे करने के लिए सबसे पहले फर्श पर पैरों को सामने की ओर फैलाकर सीधे बैठें। इसके बाद एक पैर को मोड़कर दूसरे पैर के नीचे और दूसरे पैर को उसके ऊपर इस तरह रखें कि दोनों घुटने एक-दूसरे के ऊपर आ जाएं।
अब एक हाथ को ऊपर से मोड़कर पीठ की तरफ ले जाएं और दूसरे हाथ को नीचे से पीछे की ओर ले जाकर दोनों हाथों को पकड़ने का प्रयास करें। इस दौरान पीठ और गर्दन को यथासंभव सीधा रखें और सामान्य तरीके से सांस लेते रहें। कुछ समय तक इसी स्थिति में रहने के बाद धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में वापस आएं। इसके बाद पैरों और हाथों की स्थिति बदलकर दूसरी तरफ से भी इसका अभ्यास किया जा सकता है।
ध्यान रखें कि शुरुआत में हाथों का आपस में न मिल पाना सामान्य है। जबरदस्ती हाथों को खींचने या शरीर पर अधिक दबाव डालने से बचें।
कंधे और पीठ की जकड़न में हो सकती है मदद
लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल के सामने बैठने से कंधों और ऊपरी पीठ की मांसपेशियों में जकड़न महसूस हो सकती है। गोमुखासन के दौरान कंधों और हाथों की मांसपेशियों में खिंचाव आता है, जिससे लचीलेपन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा पैरों और कूल्हों की मांसपेशियों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। नियमित और सही अभ्यास शरीर की गतिशीलता बनाए रखने में मदद कर सकता है।