Dasha Mata Vrat 2026: सनातन परंपरा में चैत्र मास के कृष्णपक्ष की दशमी तिथि का महत्व बहुत ज्यादा माना गया है, क्योंकि यह पावन तिथि दुख-दुर्भाग्य को दूर करने वाली दशा माता की पूजा और व्रत के लिए समर्पित है. इस दिन सुहागिन महिलाएं दुख-दरिद्रता को दूर करने और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने की कामना करती हैं और दशा माता का व्रत विधि-विधान से करती हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार दशा माता की पूजा से जुड़ा जो व्रत व्यक्ति को तमाम बड़े संकटों से उबार कर सुख-सौभाग्य और समृद्धि प्रदान करता है.
दशा माता व्रत 2026 डेट और मुहूर्त
दशा माता का व्रत इस साल 13 मार्च 2026 को रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:53 बजे से 11:19 बजे बजे तक रहेगा। वहीं दोपहर की पूजा का शुभ मुहूर्त 12:47 बजे से 02:16 बजे तक रहेगा।
दशा माता पूजा विधि
- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद कच्चे सूत का 10 तार वाला डोरा हल्दी में रंग लें और उसमें 10 गांठें लगाएं। यह डोरा दशा माता का प्रतीक माना जाता है।
- इसके बाद व्रती पीपल के वृक्ष की विधि विधान पूजा करें और उस पर 10 बार कच्चा सूत लपेटते हुए उसकी परिक्रमा करें।
- फिर तैयार किए गए कच्चे सूत के डोरे को गले में धारण कर लें।
- इसके बाद दशा माता की कथा सुनें।
- कई महिलाएं दशा माता की पूजा पीपल के पेड़ की छांव में करती हैं।
- इस पूजा के बाद महिलाएं अपने घर में हल्दी कुमकुम के छापे भी लगाती हैं।
- व्रती इस दिन एक ही समय बिना नमक वाला भोजन करती हैं।
दशा माता पूजा सामग्री
कच्चा सूत, कुमकुम, हल्दी और मेहंदी, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पीपल का पत्ता और सूत।
दशा माता व्रत का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार दशा माता का यह व्रत जीवन से जुड़े सभी कष्टों को दूर करके सुख-सौभाग्य दिलाने वाला है. दशा माता के आशीर्वाद से व्यक्ति दशा में सुधार होता है और उसके सभी बिगड़े काम बनने लगते हैं. इस व्रत को विधि-विधान से करने पर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और उसे पूरे साल धन की कोई दिक्कत नहीं होती है. दशा माता व्रत के पुण्यफल से घर की खुशियां बढ़ती हैं परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बना रहता है.
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