आज होगा 16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत का समापन, जानें चंद्रोदय टाइम और अर्घ्य की विधि

Mahalaxmi Vrat 2026: हिंदू धर्म में महालक्ष्मी व्रत का विशेष महत्व है. हर साल भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से लेकर अश्विन कृष्ण अष्टमी तक 16 दिनों तक माता लक्ष्मी का व्रत रखा जाता है. इस साल महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत 19 सितंबर 2026 से हुई थी और इसका समापन आज 3 अक्टूबर 2026 को होगा.

मान्यता है कि इस दिन शाम के समय विधि-विधान से महालक्ष्मी की पूजा करने से घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है और धन की कमी नहीं होती.इस बार तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण व्रत 16 की जगह 15 दिन का ही रहा. महालक्ष्मी पूजा में 16 की संख्या का खास महत्व होता है. पूजा की हर सामग्री 16 की संख्या में अर्पित की जाती है. साथ ही इस व्रत में चंद्रमा की पूजा भी जरूरी मानी जाती है. शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है.

3 अक्टूबर को प्रमुख शहरों में चंद्रोदय का समय

  • दिल्ली / NCR – रात 11:26 बजे
  • लखनऊ – रात 11:10 बजे
  • वाराणसी – रात 10:59 बजे
  • पटना – रात 10:48 बजे
  • कोलकाता – रात 10:35 बजे
  • कानपुर – रात 11:13 बजे
  • प्रयागराज – रात 11:05 बजे
  • गोरखपुर – रात 11:02 बजे
  • रांची – रात 10:45 बजे
  • जयपुर – रात 11:32 बजे
  • मुंबई – रात 11:45 बजे

चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?

चंद्रोदय के बाद कच्चे दूध और अक्षत मिलाकर चंद्र देव को अर्घ्य दें. फिर खीर का भोग लगाएं और 16 दीपकों में से एक दीपक चंद्रमा के सामने जरूर रखें. इसके बाद व्रत का पारण करें. व्रत खोलने के लिए पहले चरणामृत ग्रहण करें, फिर मीठा भोजन करें और सात्विक आहार ही लें.

व्रत का महत्व और विधि

पहले दिन 16 तारों वाले धागे में 16 गांठ लगाकर विशेष डोरा बनाया जाता है और पूजा के बाद इसे कलाई पर बांधा जाता है. पूरे 16 दिन सुबह-शाम लक्ष्मी जी की पूजा होती है. समापन के दिन 16 मीठे पुए का भोग लगाकर सुहागिन महिलाओं को दान-दक्षिणा देकर व्रत पूरा किया जाता है.

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