Religion: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। एकादशी व्रत करने वालों पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु की खास कृपा रहती है। साथ ही घर में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली का वास रहता है। हर माह में दो बार एकादशी का व्रत आता है एक कृष्ण और दूसरा शुक्ल पक्ष में। प्रत्येक महीने की एकादशी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में ही भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी का खास महत्व बताया गया है। इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। मान्यताओं के मुताबिक परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। जानिए कब है परिवर्तिनी एकादशी
कब है परिवर्तिनी एकादशी
पंचांग के मुताबिक भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 22 सितंबर को होगा। उदयातिथि के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर को रखा जाएगा।
परिवर्तिनी एकादशी 2026 पूजा शुभ मुहूर्त
परिवर्तिनी एकादशी के दिन पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से सुबह 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से दोपहर 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। वहीं विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 32 मिनट से दोपहर 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 35 मिनट से शाम 6 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। शाम की पूजा के लिए गोधूलि मुहूर्त अति उत्तम माना जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी पूजा विधि
एकादशी के दिन प्रात:काल उठकर स्नान आदि के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहने लें। संभव हो तो इस दिन पीला रंग का वस्त्र पहनें। इसके बाद हाथ में जल और अक्षत लेकर मंदिर के सामने व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल या मंदिर को साफ कर लें और गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें। अब एक चौकी रखें और उसपर पीला रंग का साफ कपड़ा बिछाएं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर रखें। विष्णु जी को चंदन का टीका लगाएं और पीले फूल, पंचामृत, तुलसीदल, फल और नैवेद्य अर्पित करें। माता लक्ष्मी को श्रृंगार का सामान चढ़ाएं और उन्हें सिंदूर का तिलक लगाएं। भगवान नारायण के सामन घी का दीया जलाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। परिवर्तिनी एकादशी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। अब भगवान श्रीहरि की आरती करें और पूजा का समापन करें।