Human Brain: हम अक्सर सुनते हैं कि इंसानी दिमाग दुनिया का सबसे पावरफुल सुपरकंप्यूटर है. हमारे दिमाग में करीब 86 अरब न्यूरॉन्स होते हैं, जो किसी एडवांस कंप्यूटर के ट्रांजिस्टर से भी ज्यादा लगते हैं. फिर भी एक मामूली कैलकुलेटर भी हमसे तेज गणना कर लेता है.
आखिर क्यों?
1. स्पीड में जमीन-आसमान का अंतर
कंप्यूटर गीगाहर्ट्ज़ स्पीड पर काम करता है, यानी एक सेकंड में अरबों ऑपरेशन. उसके इलेक्ट्रिक सिग्नल प्रकाश की गति से चलते हैं. वहीं हमारा दिमाग इलेक्ट्रो-केमिकल सिग्नल से चलता है. सबसे तेज नर्व में भी इसकी स्पीड सिर्फ 120 मीटर/सेकंड होती है. मतलब कंप्यूटर के सामने दिमाग बुलेट ट्रेन के सामने साइकिल जैसा है.
2. दिमाग एक साथ 10 काम करता है
कंप्यूटर एक लाइन में, एक-एक करके काम करता है और बहुत तेज करता है. लेकिन दिमाग पैरेलल प्रोसेसिंग का मास्टर है. जब आप भीड़ वाली सड़क पार करते हैं, तब आपका दिमाग एक ही पल में – देख रहा है, सुन रहा है, बैलेंस बना रहा है, गाड़ियों की स्पीड का अंदाजा लगा रहा है, पुरानी यादों को याद कर रहा है और दिल-धड़कन भी कंट्रोल कर रहा है. लाखों काम एक साथ, बिना हैंग हुए.
3. कनेक्शन ही असली ताकत है
ताकत सिर्फ न्यूरॉन्स की गिनती में नहीं, उनके जाल में है. एक अकेला न्यूरॉन हजारों न्यूरॉन्स से जुड़ा होता है. पूरे दिमाग में करीब 100 ट्रिलियन कनेक्शन (सिनेप्स) होते हैं. इसी जाल की वजह से हम सीखते हैं, प्यार-गुस्सा महसूस करते हैं और नया आइडिया बनाते हैं. कंप्यूटर को ये सब सिखाना पड़ता है, दिमाग खुद ही खुद को रीवायर कर लेता है.
4. सिर्फ 20 वॉट में सुपरकंप्यूटर
इंसानी दिमाग सिर्फ 20 वॉट बिजली में चलता है – जितनी एक धीमी LED बल्ब लेती है. जबकि सुपरकंप्यूटर को लाखों वॉट चाहिए होते हैं. कम बिजली में इतनी ज्यादा प्रोसेसिंग करना, आज भी साइंस के लिए सबसे बड़ी पहेली है.
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