समुद्र के अंदर कैसे बनते हैं मोती, जानें क्या होती है प्रक्रिया?

Pearl Formation: मोती को अक्सर ‘रत्नों की रानी’ कहा जाता है और हमेशा से ही इनमें एक खास तरह की भव्यता और परिष्कार झलकता रहा है. दुनिया के सबसे पुराने रत्नों में से एक, मोती का इतिहास प्राचीन रोम के समय से जुड़ा है, जहाँ इन्हें अक्सर प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था. जून का आधिकारिक जन्म रत्न होने के नाते, मोती पूर्णता और अविनाशिता का प्रतीक हैं, इसलिए यह समझना मुश्किल नहीं है कि ये महिलाओं के आभूषणों में एक अभिन्न अंग क्यों बन गए हैं. लेकिन मोती आते कहाँ से हैं?

एक बाहरी कण की वजह से होता है निर्माण 

मोती बनाने की प्रक्रिया तब शुरू हो जाती है जब कोई बाहरी कण जैसे की रेत का दाना, एक छोटा पत्थर या मलबा गलती से एक मोलस्क के मुलायम टिशु में घुस जाता है. यह काफी ज्यादा बेचैनी और जलन पैदा करता है क्योंकि मोलस्क के पास इसे अपने शरीर से निकालने का कोई आसान तरीका नहीं होता. 

प्रकृति का रक्षा तंत्र सक्रिय हो जाता है 

इसे शरीर से बाहर निकालने के लिए मोलस्क एक प्राकृतिक सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया को सक्रिय कर देता है. चोट से बचने और जलन को कम करने के लिए यह उसे बाहर निकालने के बजाय उसे अलग करना शुरू कर देता है. मोलस्क नेकर नामक एक चिकना और चमकदार पदार्थ निकलना शुरू कर देता है जिसे मदर ऑफ पर्ल के नाम से जाना जाता है. नेकर मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट और कोंचिओलिन से बना होता है. यह बाहरी कण को ढक लेता है.

समय के साथ बनता है मोती

नेकर समय के साथ परत दर परत जमा होता रहता है जिसमें हजारों सूक्ष्म परतें धीरे-धीरे जलन पैदा करने वाले पदार्थ के चारों तरफ बनती हैं. हर परत मोती के आकार, चिकनाई और चमक को बढ़ाती है. इस प्रक्रिया में महीना या फिर कई साल भी लगा सकते हैं. 

जैसे-जैसे परत जमा होती रहती है बाहरी कण एक पूरी तरह से बने हुए मोती में बदल जाता है. मोती का आकार, माप और चमक इस बात पर निर्भर करती है की नेकर के परतें कितनी समान रूप से जमा हुई हैं.

मोती इतनी दुर्लभ क्यों है?

प्राकृतिक मोती का बनना एक काफी दुर्लभ घटना है क्योंकि यह पूरी तरह से संयोग पर निर्भर होता है. इसी दुर्लभता की वजह से प्राकृतिक मोती काफी ज्यादा मूल्यवान होते हैं. आजकल बाजार में मिलने वाले ज्यादातर मोती कल्चर्ड मोती होते हैं. दरअसल इंसान सीप में एक छोटा सा न्यूक्लियस डालकर जानबूझकर कंट्रोल्ड कंडीशन में इस नेचुरल प्रोसेस को शुरू करके बनाते हैं.

कृत्रिम मोती: मोती कैसे बनते हैं?

आज बाजार में मिलने वाले अधिकांश मोती कृत्रिम रूप से उत्पादित होते हैं. कृत्रिम रूप से उत्पादित मोती प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले मोतियों की ही तरह बनते हैं. एकमात्र अंतर यह है कि मोती उत्पादकों का तैयार उत्पाद पर अधिक नियंत्रण होता है. वे जानबूझकर एक उत्तेजक पदार्थ को केंद्रक के रूप में डालते हैं . फिर, वे यह सुनिश्चित करते हैं कि घोंघा ऐसे वातावरण में रह रहा हो जहाँ वह मोती का आवरण स्रावित कर सके और फिर सही रंग के मोती पैदा कर सके . कृत्रिम रूप से उत्पादित मोतियों को बनने में आमतौर पर लगभग तीन साल लगते हैं, क्योंकि मोती उत्पादक एक बड़ा उत्तेजक पदार्थ “बीज” के रूप में डालते हैं जो प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले मोती में मौजूद होता है.

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