Gorakhpur: मकर संक्रांति के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को ब्रह्म मुहूर्त में गोरखनाथ मंदिर में नाथपंथ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार महायोगी गुरु गोरखनाथ को विधि विधान से आस्था की खिचड़ी चढ़ाई. खिचड़ी चढ़ाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी नागरिकों, संतों और श्रद्धालुओं को मकर संक्रांति की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं.
गोरखनाथ मंदिर में लाखों की संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालुजन
सीएम योगी ने कहा कि आज गुरुवार को गोरखपुर में भगवान गोरखनाथ जी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालुजन पंक्ति में लगकर श्रद्धापूर्वक खिचड़ी चढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे भी प्रातः 4 बजे गोरखनाथ मंदिर की विशिष्ट पूजा संपन्न होने के उपरांत भगवान गोरखनाथ को आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ाने का अवसर प्राप्त हुआ है. उन्होंने बताया कि गोरखनाथ मंदिर में लाखों की संख्या में श्रद्धालुजन आस्था की पवित्र खिचड़ी चढ़ाने आए हुए हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि मकर संक्रांति भारत के पर्व और त्योहारों की परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है. वास्तव में सूर्यदेव इस जगत की आत्मा हैं. जगतपिता सूर्य की उपासना का यह पर्व, हर प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए प्रशस्ति तिथि माना जाता है. आज के बाद से सनातन धर्म की परंपरा में सभी मांगलिक कार्यक्रम प्रारंभ हो जाएंगे.
मुख्यमंत्री ने सभी के प्रति मंगल में शुभकामनाएं व्यक्त कीं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मकर संक्रांति का पर्व एक ऐसा पर्व है जो देश के अंदर पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण सभी हिस्सों में अलग-अलग नाम और रूप में आयोजित होता है. पूरब में बिहू या तिलवा संक्रांति, पश्चिम में लोहड़ी, दक्षिण भारत में पोंगल और उत्तर भारत में खिचड़ी संक्रांति के रूप में मकर संक्रांति का आयोजन बड़ी श्रद्धाभाव के साथ किया जाता है. मकर संक्रांति के अवसर पर प्रदेश के अलग-अलग धर्मस्थलों पर देश और दुनिया से आए श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी के प्रति मंगल में शुभकामनाएं व्यक्त कीं.
संगम में आस्था की पवित्र डुबकी लगा रहे श्रद्धालु
उन्होंने कहा कि एक तरफ गोरखपुर में लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा गोरखनाथ को आस्था की खिचड़ी अर्पित कर रहे हैं. तो, वहीं प्रयागराज में लाखों की संख्या में श्रद्धालु, कल्पवासी, पूज्य संतजन प्रयागराज की धरती पर उपस्थित होकर न केवल अपनी साधना में रत हैं अपितु भगवान बेनीमाधव, भगवान प्रयागराज और मां गंगा, मां जमुना, मां सरस्वती के सानिध्य में संगम में आस्था की पवित्र डुबकी लगा रहे हैं.
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