Health tips: हम जिस तरह का खाना खाते हैं उसका सीधा असर हमारी सेहत पर देखने को मिलता है. ऐसे में लोगों को हेल्दी और कम तेल वाला खाना खाने की सलाह दी जाती है. इन दिनों हार्ट अटैक के मामले काफी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं और भारत जैसे विकासशील देशों में इसकी संख्या तेज़ी से बढ़ रही है. आप रोज़ाना जिस तरह का तेल खाना पकाने के लिए इस्तेमाल करते हैं उसका हृदय के स्वास्थ्य पर बहुत बड़ा असर पड़ सकता है. हार्ट अटैक के बढ़ते मामले को देखते हुए सही तेल चुनना बेहद जरूरी है. ऐसे में इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं कि रोज खाना पकाने के लिए कौन से तेल का इस्तेमाल करना चाहिए.
भारतीय खाना पकाने के लिए शीर्ष स्वस्थ तेल
| तेल का प्रकार | फ़ायदे | स्मोक पॉइंट |
| घी | वसा में घुलनशील विटामिन A, D, E और K से भरपूर. रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन तंत्र को मज़बूत करता है. आंत के स्वास्थ्य के लिए ब्यूटिरेट युक्त. | 250 डिग्री सेल्सियस |
| सरसों का तेल | ओमेगा-6 और ओमेगा-3 का उत्कृष्ट अनुपात. इसमें सूजन-रोधी यौगिक होते हैं और यह हृदय रोग के जोखिम को काफ़ी कम करता है. | 250 डिग्री सेल्सियस |
| नारियल का तेल | त्वरित ऊर्जा के लिए मध्यम-श्रृंखला ट्राइग्लिसराइड्स (MCTs) से भरपूर. मस्तिष्क और आंत के स्वास्थ्य में सहायक. | वर्जिन: 175°C, रिफाइंड: 230°C |
| तिल का तेल | एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ई से भरपूर. जोड़ों और त्वचा के स्वास्थ्य का समर्थन करता है. | अपरिष्कृत: 177°C, परिष्कृत: 232°C |
| मूँगफली का तेल | इसमें स्वस्थ वसा और पादप स्टेरोल होते हैं जो कोलेस्ट्रॉल कम करते हैं. सीमित मात्रा में सेवन करने पर हृदय के लिए अनुकूल. | 232-235 डिग्री सेल्सियस |
| जैतून का तेल | मोनोअनसैचुरेटेड वसा और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर. कम आँच पर पकाने के लिए सर्वोत्तम. | एक्स्ट्रा वर्जिन: 190°C, रिफाइंड: 240°C |
इस तेल के इस्तेमाल से बचें
रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल्स: सोयाबीन, सूरजमुखी या कॉर्न ऑयल को बहुत ज्यादा प्रोसेस किया जाता है. इनमें ओमेगा-6 बहुत अधिक होता है, जो शरीर में सूजन (inflammation) बढ़ा सकता है.
डालडा या वनस्पति: इनमें ट्रांस फैट्स होते हैं, जो दिल की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण हैं.
तेल बदलने की आदत डालें
डॉक्टर और डाइटिशियन सलाह देते हैं कि आपको हर 1-2 महीने में अपना कुकिंग ऑयल बदलते रहना चाहिए या दो तेलों का मिश्रण (जैसे सरसों और मूंगफली) इस्तेमाल करना चाहिए. इससे शरीर को अलग-अलग तरह के फैटी एसिड मिलते रहते हैं.
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