दुनिया में कब और कैसे हुई लोकतंत्र की शुरुआत, यहाँ देखें विस्तृत इतिहास 

History of democracy: आज जब हम भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में रहते हैं, तो सत्ता का केंद्र जनता के हाथ में होना हमें सामान्य लगता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह विचार पहली बार दुनिया में कहां पनपा था? लोकतंत्र का इतिहास प्रगति का एक ताना-बाना है, जो प्राचीन ग्रीस में इसकी उत्पत्ति से लेकर आज विश्व भर में इसके विभिन्न रूपों तक फैला हुआ है. यह जनता को शक्ति प्रदान करने की दिशा में एक निरंतर विकसित होती यात्रा रही है.

लोकतंत्र का जन्म

“लोकतंत्र” शब्द की उत्पत्ति 2400 वर्ष पूर्व प्राचीन ग्रीस में हुई थी. यह दो ग्रीक शब्दों से मिलकर बना है: “डेमोस,” जिसका अर्थ है आम लोग, और “क्रेटोस,” जिसका अर्थ है शक्ति. इस अवधारणा ने आज के लोकतंत्र की नींव रखी—एक ऐसी व्यवस्था जहाँ नागरिक सीधे सत्ता का प्रयोग करते हैं या अपने बीच से प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं.

प्राचीन काल के दौरान एथेंस नगर-राज्य को लोकतंत्र का अग्रदूत माना जाता है, जिसका इतिहास 580-507 ईसा पूर्व तक जाता है. क्लेइस्थेनेस, जिन्हें अक्सर एथेनियन लोकतंत्र का जनक कहा जाता है, ने दो विशिष्ट विशेषताओं के साथ एक प्रत्यक्ष लोकतंत्र की स्थापना की.

कौन लेता था सारे फैसले?

प्राचीन एथेंस के लोकतंत्र और आज के लोकतंत्र में सबसे बड़ा बुनियादी अंतर सीधी भागीदारी का था. उस दौर में लोकतंत्र का मतलब था कि आम नागरिक खुद सभाओं में शामिल होकर राज्य के कानून और नीतियों पर सीधे वोट करते थे. इसे सीधा लोकतंत्र कहा जाता है. यानी वहां कोई प्रतिनिधि चुनने की जरूरत नहीं थी; नागरिक स्वयं विधायिका की भूमिका निभाते थे और हर बड़े फैसले पर अपनी राय देते थे.

सीमित था लोकतंत्र का दायरा

हालांकि एथेंस का लोकतंत्र क्रांतिकारी था, लेकिन यह अपने दायरे में सीमित भी था. आज के लोकतंत्र में जैसे सभी वयस्क नागरिकों को वोट देने का समान अधिकार प्राप्त है, वैसा वहां नहीं था. उस दौर की व्यवस्था में केवल योग्य पुरुष नागरिक ही सभाओं में हिस्सा लेने के हकदार थे. महिलाएं, दास या गुलाम, और बाहर से आकर बसे लोगों को इस निर्णय प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर रखा गया था. इसलिए, यह लोकतंत्र आज की व्यापक अवधारणा की तुलना में काफी संकुचित था.

बदलाव के साथ बढ़ी आधुनिक व्यवस्था

भारत में आधुनिक लोकतंत्र की औपचारिक स्थापना 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने के साथ हुई, जिसके बाद भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया. हालाँकि, 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता के साथ ही भारत ने लोकतांत्रिक मूल्यों को अपना लिया था, और 1951-52 में पहले आम चुनाव के साथ यह प्रणाली पूरी तरह सक्रिय हो गई.

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