Biggest Natraj Statue: भारत में कई ऐसी मूर्तियां हैं जो देश और दुनिया भर के लोगों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं हैं और इन्हें देखने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं. आज आपको ऐसी ही एक मूर्ती के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के उदयपुर में मौजूद है. ये नटराज की सबसे विशाल मूर्ति है. इसका इतिहास 1500 साल पुराना है. ये प्राचीन मूर्ति विशाल चट्टान में तराश कर बनाई गई थी. इस मूर्ति की बनावट भी काफी अलग है. इसका वजन और लंबाई-चौड़ाई हमेशा ही चर्चा का केंद्र बनी रहती है.
1500 साल पुराना है नटराज मूर्ति का इतिहास
कुछ साल पहले मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में एक ही पत्थर से बनी भगवान नटराज की लगभग 1500 साल पुरानी मूर्ति मिली, जो रहस्यमय तरीके से खड़ी करने के बजाय जमीन पर ही छोड़ दी गई थी. INTACH के राज्य संयोजक मदन मोहन उपाध्याय ने कहा था, ‘यह दुनिया की सबसे बड़ी नटराज मूर्ति है. इन खंडहरों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल बनने की बड़ी संभावना है.’विदिशा जिला प्रशासन, मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग और राज्य पुरातत्व विभाग भी इस समृद्ध विरासत को संरक्षित करने के उपायों पर काम कर रहे हैं.
वजन और आकार में अद्भुत
यह भव्य और विशालकाय प्रतिमा आकार में मामले में बेहद अनूठी है. इसकी लंबाई करीब 27 फीट, चौड़ाई 16 फीट और मोटाई 5 फीट से भी ज्यादा है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक ही शिलाखंड पर उकेरी गई इस पूरी नटराज की प्रतिमा का वजन लगभग 200 टन के बीच है, जो इस विश्व की सबसे भारी शिव प्रतिमाओं में एक बनाता है. इस जगह और भगवान शिव के नीलकंठेश्वर मंदिर के निर्माण की कहानी शिलालेखों में लिखी है.
रावणटोल से नटराज तक का सफर
उदयपुर के प्रसिद्ध नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर से करीब 1.5 किलोमीटर दूर पहाड़ी की तलहटी में स्थित इस मूर्ति की पहचान लंबे समय तक छिपी रही. विशाल आकार होने और सही जानकारी न होने की वजह से स्थानीय लोग इसे बरसों से रावणटोल के नाम से जानते थे. इसके अलावा इतिहास में एक समय ऐसा भी जब लोग इसे एक पत्थर का खंभा मानते थे. प्रतिमा आकार में इतनी बड़ी है कि इसे एक फ्रेम में कैद करना आसान नहीं था, ड्रोन से इसका निरीक्षण करने पर यह पत्थर नटराज की मूर्ति निकली.
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