Solar Energy: भारत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में वर्ष 2026 के दौरान नया रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है. जनवरी से जून 2026 के बीच देश ने 34 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़कर नया कीर्तिमान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है. ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून के बीच हुई यह बढ़ोतरी पिछले साल की समान अवधि से 38 प्रतिशत अधिक है. अगर यही रफ्तार साल के दूसरे हिस्से में भी कायम रही, तो भारत 2026 में 50 गीगावाट से ज्यादा नई सौर क्षमता जोड़ सकता है, जो देश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक विस्तार होगा.
कीमतों में कमी आने की उम्मीद
देश में जैसे-जैसे सौर सेल निर्माण की अतिरिक्त क्षमता तैयार होगी, वैसे-वैसे कीमतों में भी धीरे-धीरे स्थिरता आने की उम्मीद है. उनका अनुमान है कि 2029 तक भारतीय सौर बाजार अधिक संतुलित स्थिति में पहुंच सकता है. हालांकि, इसके लिए नीतियों में स्थिरता बनाए रखना और निर्माताओं की ओर से समय पर उत्पादन क्षमता का विस्तार करना बेहद जरूरी होगा.
घरेलू सौर सप्लाई में एएलएमएम-II का महत्वपूर्ण कदम
डेवलपर्स ने मॉडल और निर्माताओं की स्वीकृत सूची-II (एएलएमएम-II) की जून 2026 समयसीमा से पहले परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने का प्रयास किया. इसी वजह से वर्ष की पहली छमाही में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण और कमीशनिंग में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली. एएलएमएम-II पूरी तरह एकीकृत घरेलू सौर सप्लाई चेन विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
छूट 75 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत
इस वर्ष सौर ऊर्जा क्षेत्र में तेजी का एक अन्य कारण अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन शुल्क में मिलने वाली छूट का धीरे-धीरे कम होना भी रहा. जुलाई 2026 से कमीशन होने वाली परियोजनाओं के लिए यह छूट 75 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दी गई है, जबकि जुलाई 2028 के बाद इसे पूरी तरह समाप्त करने की योजना है. इसी वजह से कई डेवलपर्स ने समयसीमा से पहले परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी दिखाई.
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