आयुर्वेद के अनुसार मानसून में कैसी होनी चाहिए डाइट, जानें क्या खाएं और क्या नही

Monsoon Diet In Ayurveda: मानसून में बारिश की वजह से आस-पास गंदगी जमा हो जाने मच्छर, मक्खियां और दूसरे कीड़े-मकोड़े बहुत बढ़ जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. इस मौसम में होने वाली उमस से शरीर में वात दोष का असंतुलन होता है और पाचन शक्ति भी कमजोर हो जाती है. इसके अलावा वात के बिगड़ने और बारिश की वजह से पाचन क्रिया पर बुरा असर पड़ता है. बीच-बीच में होने वाली ड्राईनेस की वजह से शरीर में पित्त दोष भी बढ़ने लगता है. 

क्या खाएं:

  • हल्का भोजन: मूंग की दाल, खिचड़ी, दलिया और उबली हुई सब्जियां खाएं.
  • इम्युनिटी बढ़ाने वाले: अदरक, लहसुन, हल्दी और काली मिर्च का खाने में अधिक उपयोग करें.
  • मौसमी फल: जामुन, पपीता और अनार जैसे फलों का सेवन करें.
  • तरल पदार्थ: नारियल पानी, नींबू पानी, गर्म सूप और हर्बल चाय पिएं. हमेशा उबला या साफ पानी ही पिएं.

क्या न खाएं:

  • स्ट्रीट फूड: गोलगप्पे, चाट और खुले में कटे हुए फल खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है.
  • तला-भुना: पकौड़े, समोसे या ज्यादा मसालेदार खाना पचाने में मुश्किल होता है और गैस-एसिडिटी पैदा करता है.
  • हरी पत्तेदार सब्जियां: बरसात में पालक और पत्तागोभी में कीड़े और मिट्टी होने का डर रहता है, इसलिए इन्हें न खाएं.
  • सी-फूड (मछली आदि): मानसून मछली का प्रजनन का मौसम होता है, इसलिए संक्रमण से बचने के लिए सी-फूड से परहेज करना चाहिए.

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