Religion: आज, 19 अगस्त को भक्ति काल के महान संत और महाकाव्य रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती मनाई जा रही है। रामचरितमानस की चौपाइयों में जीवन की अलग-अलग परिस्थितियों और समस्याओं का वर्णन मिलता है। इनसे बचने के लिए रामचरितमानस की चौपाइयों का पाठ करना चाहिए। आज तुलसी जयंती के मौके पर जानते हैं कि जीवन में आने वाले संकटों से बचने के लिए किन चौपाइयों का पाठ करने से पढ़ाई और स्वास्थ्य से लेकर रिश्तों को बनाए रखने तक के लिए किन चौपाइयों का, कितनी बार जाप करना चाहिए।
जानिए रामचरितमानस के बारे में
हर साल श्रावण शुक्ल पक्ष की सप्तमी को तुलसीदास जी की जयंती मनाई जाती है। तुलसीदास जी भगवान राम के चरित्र और उनकी मर्यादा से अत्यंत प्रभावित थे। अनेक ग्रंथों का अध्ययन करने के बाद उन्होंने संस्कृत में रचित रामायण को आमजन की भाषा में लिखने के बारे में सोचा। उन्होंने अवधी भाषा में ‘श्रीरामचरितमानस’ के माध्यम से श्री राम जी के चरित्र का वर्णन किया। तुलसीकृत रामायण सनातन धर्म के प्रमुख धार्मिक ग्रंथों में से एक है।
आज करें रामचरितमानस की इन चौपाइयों का पाठ
अगर आपका बच्चा पढ़ाई में कमजोर है, उसके परीक्षा में अच्छे नंबर नहीं आते तो तुलसीदास जी के विद्या प्राप्ति चौपाई का 21 बार जप कीजिये।
गुरु ग्रह गए पढ़न रघुराई।
अलपकाल विद्या सब आई।
इसके अलावा समाज में, अपने परिवार में या अपने रिश्तेदारों के साथ रिश्ते अच्छे करने के लिये, आपस में प्रेम भाव बढ़ाने के लिए इस चौपाई का 11 बार जाप करें।
सब नर करहिं परस्पर प्रीती।
चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीती।
अच्छे स्वास्थ्य की कामना और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से मुक्ति पाने या उनसे बचने के लिये इस चौपाई का 11 बार जप करें।
दैहिक दैविक भौतिक तापा।
राम राज नहिं काहुहिं व्यापा।
संतान की इच्छा रखने वाले दम्पतियों को आज के दिन इस चौपाई का 51 बार जप करना चाहिए।
प्रेम मगन कौशल्या निसिदिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बाल चरित कर गान।
अचानक आये संकटों से बचने के लिये, इस चौपाई का 108 बार जप करें।
दीन दयाल बिरिदु संभारी।
हरहु नाथ मम संकट भारी।