Air Pollution: हवा में बढ़ता धुआं, धूल और पार्टिकुलेट प्रदूषण केवल बाहर निकलने में परेशानी पैदा नहीं करता, बल्कि सांस से जुड़ी दिक्कतों को भी बढ़ा सकता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अस्थमा या दूसरी सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को प्रदूषित हवा में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है. ऐसे में रोजमर्रा की कुछ आसान आदतों और थोड़ी सतर्कता के जरिए सांस की सेहत का ख्याल रखा जा सकता है.
स्वास्थ्य पर प्रभाव
फेफड़ों की कमजोरी: धूल और धुएं के महीन कण फेफड़ों की कार्यक्षमता को घटाते हैं।
अस्थमा और एलर्जी: वायु प्रदूषण से सांस फूलना, खांसी और अस्थमा का दौरा पड़ना आम हो जाता है।
हार्ट अटैक का जोखिम: अति सूक्ष्म कण खून में मिलकर दिल की बीमारियों और दौरे का खतरा बढ़ाते हैं।
बचाव के उपाय
मास्क पहनें: बाहर निकलते समय हमेशा N95 मास्क का प्रयोग करें।
वायु गुणवत्ता जांचें: घर से बाहर जाने से पहले स्थानीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) की स्थिति देखें।
खिड़कियां बंद रखें: बाहर ज्यादा धुआं या धूल होने पर घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें।
योग और प्राणायाम भी हो सकते हैं मददगार
सांस और शरीर को सक्रिय रखने के लिए योग को भी अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है. अपनी क्षमता के अनुसार भुजंगासन और गोमुखासन जैसे आसनों का अभ्यास किया जा सकता है. इनके साथ नाड़ी शोधन और भ्रामरी प्राणायाम भी किए जा सकते हैं.
गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज न करें
अगर सांस लेने में ज्यादा परेशानी, लगातार खांसी, सीने में दर्द, तेज घरघराहट या सांस फूलने जैसी समस्या हो, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
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