राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती आज, राजघाट पर PM मोदी ने बापू को दी श्रद्धांजलि

Gandhi Jayanti: महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार को पूरे देश में राष्ट्रपिता बापू को श्रद्धा के साथ याद किया जा रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित राजघाट पहुंचकर बापू को पुष्पांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने महात्मा गांधी की समाधि पर फूल चढ़ाकर उन्हें नमन किया। देशभर में आज गांधी जयंती पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और गांधी से जुड़े संस्थानों में बापू के विचारों और उनके योगदान को याद किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गांधी जी को नमन करते हुए कहा कि उनके विचार और संदेश आज भी समाज को बेहतर दिशा देने की प्रेरणा देते हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि गांधी जी का कालजयी संदेश एक बेहतर समाज और विकसित भारत के निर्माण के लिए लोगों को प्रेरित करता रहेगा. पीएम मोदी ने इस अवसर पर एक वीडियो भी साझा किया. इसमें उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर का भारत के इतिहास और राष्ट्रजीवन में विशेष महत्व है. उनके मुताबिक, गांधी जी के विचारों का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी दुनिया के लोगों को उनसे प्रेरणा मिली है. उन्होंने कहा कि सत्ता से दूर रहते हुए भी गांधी जी आज करोड़ों लोगों के दिलों में विशेष स्थान रखते हैं.

गांधी विचारों की प्रासंगिकता पर जोर Gandhi Jayanti

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब तक मानवता के बीच गांधी जी के विचारों का प्रसार जारी रहेगा, तब तक उनकी प्रेरणा और प्रासंगिकता भी बनी रहेगी. उन्होंने गांधी जी के स्वदेशी और आत्मनिर्भरता से जुड़े विचारों का उल्लेख करते हुए खादी को विशेष महत्व देने की बात कही. पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि गांधी जयंती के अवसर पर कम से कम एक खादी उत्पाद जरूर खरीदें और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने के प्रति गर्व महसूस करें.

सत्य, अहिंसा और सेवा को किया याद

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत श्लोक साझा करते हुए महात्मा गांधी के जीवन मूल्यों को याद किया. उन्होंने लिखा कि बापू का पूरा जीवन सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा की ऐसी मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी मानवता का रास्ता दिखाती रहेगी. उन्होंने जो श्लोक साझा किया, वह है: “अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च। निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी॥”

इसका भावार्थ है कि जो व्यक्ति किसी भी जीव के प्रति वैर नहीं रखता, सभी के प्रति मित्रता और करुणा का भाव रखता है, अहंकार और ममता से मुक्त रहता है, सुख-दुख में समान भाव बनाए रखता है और क्षमा करने वाला होता है, वही श्रेष्ठ साधक माना जाता है. गांधी जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री का यह संदेश सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और स्वदेशी जैसे उन मूल्यों पर केंद्रित रहा, जिन्हें महात्मा गांधी के सार्वजनिक जीवन से जोड़ा जाता है.

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