Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि शिव महापुराण के मंगलाचरण में भगवान व्यास कहते हैं कि भगवान शंकर इस संसार के आदि, मध्य और अन्त तीनों में है। इसका तात्पर्य हुआ भगवान सदैव है। भूतकाल में कोई ऐसा समय नहीं था जब परमात्मा नहीं थे, आज भी हैं और भविष्य में कोई ऐसा समय नहीं आने वाला है जब परमात्मा नहीं होंगे।
शिव समस्त मंगल के मूल हैं और समस्त अमंगल का हरण करने वाले हैं। ईश्वर का सबके प्रति समान भाव है। शिव सबका कल्याण करते हैं। शिव पंचानन है। भगवान शंकर के पांच मुख हैं जैसे पंचों की बात सब मानते हैं। देवताओं में जब कोई असमंजस जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, समाधान नहीं निकल पाता है, तो देवता भगवान शंकर के पास जाते हैं और भगवान शंकर जो समाधान देते हैं। सभी देवता उसको स्वीकार करते हैं।
अठारह पुराणों में श्री सूत जी ने शिव महापुराण की कथा शौनकादि ऋषियों को प्रयागराज में सुनाया। प्रारम्भ में शौनकादि ऋषियों ने प्रश्न किया- कलियुग में लोग अपना धर्म कर्म भूल जाएंगे, फिर कलयुग के जीवों का कल्याण कैसे होगा। शिव महापुराण के प्रारम्भ में श्रवण,कीर्तन और मनन त्रिधा भक्ति का निरूपण किया गया है।
श्रोतेत्र श्रवण तस्य वचसा कीर्तनं तथा।
मनसा मननं तस्य महासाधन मुच्यते।।
त्रिधा भक्ति में कानों से भगवान की कथा सुनना प्रथम भक्ति है, वाणी से भगवान का कीर्तन करना द्वितीय भक्ति है और मन से भगवान का स्मरण करना तीसरी भक्ति है। शिव के पांच मुख हैं और ऊँकार में पांच मात्राएं होती हैं।अ,उ,म, आधा चांद और बिंदु। शिवलिंग पिण्डी के उत्तर मुखिया ‘अ ‘ पूर्व मुख से ‘ उ ‘ पश्चिम मुख से ‘म ‘ दक्षिण मुख से चांद और ऊपर मुख से बिंदु। ऊँकार शब्द भगवान शंकर का वाचक है। ऊँ ज्योति रूप है। 108 करोड़ शिव मंत्र जपने से शिवलोक की प्राप्ति हो जाती है।
सभी देवताओं ने भगवान शिव से मंत्र के लिये प्रार्थना किये- तब भगवान शिव के उत्तर मुख से ‘ न ‘ पश्चिम मुख से ‘ म ‘ दक्षिण मुख से ‘ शि ‘ पूर्व मुख ‘ वा ‘ ऊपर के मुख से य। सबसे पहले भगवान शिव से प्रणव प्रकट हुआ , उसके बाद नमः शिवाय पंचाक्षर मंत्र प्रकट हुआ। नमः शिवाय मंत्र से गायत्री मंत्र का प्राकट्य हुआ, गायत्री से वेदों का प्राकट्य हुआ इसी कारण गायत्री माता को वेद माता गायत्री कहते हैं। वेद से करोड़ों मंत्र प्रकट हो गये। समस्त मंत्रों में श्रेष्ठ मंत्र है ऊँ नमः शिवाय।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) श्री दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).