Sports: आइची-नागोया में खेले जा रहे एशियन पैरा गेम्स के पांचवें दिन की शुरुआत भारतीय दल के लिए शानदार रहा। प्रतियोगिता के पांचवें दिन भारत ने खेल के मैदान पर एक बार फिर अपना दबदबा साबित किया है। बैडमिंटन और पैरा आर्चरी में मिले शानदार गोल्ड और सिल्वर मेडल की बदौलत भारत के कुल पदकों की संख्या अब 90 के आंकड़े को पार कर गई है। इस बेहतरीन प्रदर्शन से मेडल टैली में भारत की स्थिति और अधिक मजबूत हो गई है।
बैडमिंटन में भारत का दबदबा, देश के खाते में आए गोल्ड और सिल्वर
दिन की शुरुआत बैडमिंटन कोर्ट से बेहद सुखद खबरों के साथ हुई। पुरुष सिंगल्स (SL3) वर्ग के फाइनल मुकाबले में भारत के नितेश कुमार और प्रमोद भगत आमने-सामने थे। इस रोमांचक मुकाबले में नितेश कुमार ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए प्रमोद भगत को सीधे सेटों में 21-18, 21-16 से हराकर देश के लिए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस तरह इस स्पर्धा में पहला और दूसरा स्थान दोनों भारत की झोली में आए, जहां नितेश को गोल्ड और प्रमोद को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। इसके अलावा महिला सिंगल्स (SU5) के फाइनल में थुलसिमथी मुरुगेसन ने भी कड़ा संघर्ष करते हुए रजत पदक हासिल किया और देश के पदकों की संख्या बढ़ाने में अहम योगदान दिया।
पैरा आर्चरी में तीरंदाजी का कमाल
तीरंदाजी के मैदान पर भी भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन जबरदस्त रहा है। पैरा आर्चरी की पुरुष रिकर्व टीम स्पर्धा में हरविंदर सिंह और विजय सुंडी की जोड़ी ने कमाल का प्रदर्शन किया। पहले सेट की बराबरी के बाद भारतीय जोड़ी ने शानदार वापसी की और अगले दोनों सेट जीतकर चीन को 5-1 से करारी शिकस्त दी। इस शानदार जीत के साथ भारत को दिन का एक और गोल्ड मेडल मिल गया। हालांकि महिला रिकर्व डबल्स के फाइनल में पूजा जत्यान और भावना चौधरी को चीन के खिलाफ मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
100 पदकों के आंकड़े की ओर बढ़ती भारतीय टीम
एथलेटिक्स में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन जारी रखा। पुरुषों की 1500 मीटर (T46) स्पर्धा में प्रमोद ने बेहतरीन दौड़ लगाते हुए रजत पदक अपने नाम किया और पिछले हांगझू गेम्स के अपने प्रदर्शन को दोहराया। शुरुआती चार दिनों में 26 पदक जीतने के बाद, पांचवें दिन के इन नए पदकों के साथ भारत की कुल मेडल टैली 90 के पार पहुंच चुकी है। अब भारतीय दल की नजरें 100 पदकों के आंकड़े को पार करने और पिछले साल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने पर टिकी हुई हैं।